मनरेगा का दौर खत्म: 1 जुलाई से लागू होगा नया ‘जी-रामजी’ कानून, अब ग्रामीणों को मिलेंगे ये बड़े फायदे

Delhi News: केंद्र सरकार ने ग्रामीण भारत की तस्वीर बदलने के लिए एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। आगामी 1 जुलाई से दशकों पुराने मनरेगा (MGNREGA) कानून को खत्म कर दिया जाएगा। इसकी जगह अब नया ‘जी-रामजी’ (G-RAMJI) कानून पूरे देश में प्रभावी होगा। सरकार का दावा है कि यह नया मॉडल केवल मजदूरी तक सीमित नहीं रहेगा। यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर और विकसित बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम साबित होगा।

नए ‘जी-रामजी’ कानून के तहत अब ग्रामीण परिवारों को साल में 100 के बजाय 125 दिन के रोजगार की कानूनी गारंटी मिलेगी। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यह बदलाव मजदूरों और किसानों की आय बढ़ाएगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि पुरानी व्यवस्था से नई व्यवस्था में बदलाव के दौरान किसी का काम नहीं रुकेगा। वर्तमान में चल रहे सभी प्रोजेक्ट्स और पुराने जॉब कार्ड नए नियम लागू होने के बाद भी पूरी तरह मान्य रहेंगे।

गड्ढे खोदने से आगे बढ़ेगा ग्रामीण विकास का दायरा

यह कानून ‘विकसित भारत-2047’ के व्यापक लक्ष्य को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। अब केवल गड्ढे खोदने जैसे सीमित कार्यों के बजाय गांवों में स्थायी बुनियादी ढांचे के निर्माण पर जोर दिया जाएगा। नई योजना के तहत जल संरक्षण, स्कूल भवन, आंगनवाड़ी केंद्र और बाढ़ सुरक्षा जैसे स्थायी निर्माण कार्यों को प्राथमिकता मिलेगी। किसान उत्पादक संगठनों (FPO) और स्वयं सहायता समूहों के लिए भी विशेष वर्किंग शेड का निर्माण इस योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।

मजदूरी भुगतान के मामले में सरकार ने सख्त जवाबदेही तय की है। अब मजदूरों का पैसा सीधे उनके बैंक या डाकघर खातों में डीबीटी के जरिए भेजा जाएगा। सरकार ने भुगतान के लिए महज 3 दिन का लक्ष्य रखा है, जबकि अधिकतम सीमा 15 दिन होगी। यदि भुगतान में देरी होती है, तो मजदूरों को नियमानुसार अतिरिक्त मुआवजा मिलेगा। काम मांगने पर न मिलने की स्थिति में सरकार बेरोजगारी भत्ता देने के लिए भी कानूनी रूप से बाध्य होगी।

ग्रामीण रोजगार के लिए अब तक का सबसे बड़ा बजट

सरकार ने इस नई व्यवस्था को वित्तीय रूप से मजबूत बनाने के लिए खजाना खोल दिया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए केवल केंद्र सरकार ने 95 हजार करोड़ रुपये का भारी-भरकम प्रावधान किया है। राज्यों की हिस्सेदारी शामिल करने के बाद यह कुल बजट 1.51 लाख करोड़ रुपये से भी अधिक हो जाएगा। यह देश के इतिहास में ग्रामीण रोजगार के लिए आवंटित अब तक की सबसे बड़ी राशि है, जो स्थानीय बाजारों में भारी मांग पैदा करेगी।

प्रशासनिक स्तर पर सरकार ने मजदूरों की सहूलियत का पूरा ध्यान रखा है। जिन मजदूरों का ई-केवाईसी (e-KYC) अभी पूरा नहीं हुआ है, उन्हें भी काम से वंचित नहीं रखा जाएगा। सरकार का मानना है कि इस योजना से ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचा मजबूत होगा और पलायन की समस्या पर भी रोक लगेगी। नए कानून के माध्यम से गांवों में निर्माण गतिविधियों को तेज कर स्थानीय स्तर पर ही आजीविका के बेहतर अवसर पैदा किए जाएंगे।

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