Kolkata News: पश्चिम बंगाल में भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एक और बड़ी कार्रवाई की है। तृणमूल कांग्रेस के कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री सुजीत बोस को सोमवार को लंबी पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर लिया गया। जांच एजेंसी का दावा है कि बोस के खिलाफ पुख्ता सबूत मिले हैं। उन पर नगरपालिका भर्ती घोटाले में शामिल होने का गंभीर आरोप है। इस गिरफ्तारी के बाद राज्य की राजनीति में एक बार फिर भूचाल आ गया है।
ईडी की जांच के मुताबिक सुजीत बोस ने साउथ दमदम नगरपालिका में नियुक्तियों के लिए करीब 150 उम्मीदवारों की अवैध सिफारिश की थी। आरोप है कि इस मदद के बदले उन्होंने भारी आर्थिक लाभ कमाया। जांच एजेंसी ने उनकी कई संपत्तियों और फ्लैटों को ‘अपराध की कमाई’ के रूप में चिह्नित किया है। उनके बैंक खातों में भी संदिग्ध नकद जमा होने के प्रमाण मिले हैं। उन्हें मंगलवार सुबह कोलकाता की विशेष अदालत में पेश किया जाएगा।
कौन हैं सुजीत बोस और क्या है उनका राजनीतिक कद?
सुजीत बोस पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बेहद करीबी माने जाते हैं। वह बिधाननगर क्षेत्र से कई बार विधायक चुने जा चुके हैं। ममता सरकार में उन्होंने अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं विभाग के मंत्री के रूप में भी कार्य किया है। साल्ट लेक और उत्तर कोलकाता के इलाकों में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। छात्र राजनीति से करियर शुरू करने वाले बोस टीएमसी के एक प्रमुख संगठनात्मक चेहरे के रूप में जाने जाते हैं।
यह पूरा मामला बंगाल की विभिन्न नगरपालिकाओं में हुई अवैध नियुक्तियों से जुड़ा है। कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने इस घोटाले में एफआईआर दर्ज की थी। उसी आधार पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की। आरोप है कि क्लर्क, स्वीपर और ड्राइवर जैसे पदों पर पैसे लेकर अयोग्य लोगों को भर्ती किया गया। इस घोटाले के तार कई बड़े नेताओं और सरकारी अधिकारियों से जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है।
छापेमारी में मिले थे 45 लाख रुपये और अहम दस्तावेज
अक्टूबर 2025 में ईडी ने सुजीत बोस के दफ्तर और आवास सहित 13 ठिकानों पर सघन छापेमारी की थी। उस दौरान जांच एजेंसी को 45 लाख रुपये नकद और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज मिले थे। इन सुरागों ने ही सुजीत बोस की गिरफ्तारी का आधार तैयार किया। ईडी का आरोप है कि अयान सील नामक व्यक्ति की कंपनी एबीएस इन्फोजोन को सभी भर्ती परीक्षाओं के ठेके दिए गए थे। इसी कंपनी ने ओएमआर शीट में हेरफेर किया था।
जांच में यह भी सामने आया कि अयान सील ने राजनीतिक आकाओं के साथ मिलकर एक बड़ी आपराधिक साजिश रची थी। कांचरापाड़ा, न्यू बैरकपुर और कमरहाटी जैसी नगरपालिकाओं में भी इसी तरह की धांधली के सबूत मिले हैं। ओएमआर शीट का मूल्यांकन और मेरिट लिस्ट तैयार करने में पूरी तरह पारदर्शिता को ताक पर रखा गया। फिलहाल ईडी अयान सील के खिलाफ पहले ही कोर्ट में अभियोजन शिकायत दर्ज कर चुकी है और जांच जारी है।

