खाड़ी में युद्ध के बीच रूस ने भारत को दिया बड़ा भरोसा, क्या अब नहीं रुकेगी कच्चे तेल की सप्लाई?

India News: पश्चिमी एशिया में भारी तनाव और होर्मुज संकट के बीच एक बड़ी राहत की खबर आई है। रूस ने भारत को आश्वस्त किया है कि वह देश की ऊर्जा जरूरतों को जरूर पूरा करेगा। खाड़ी क्षेत्र से तेल की सप्लाई में कोई बाधा आती है, तो रूस लगातार सप्लाई जारी रखेगा। इस अहम भरोसे ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा चिंताओं को काफी हद तक कम कर दिया है।

रूस ने दिया कच्चा तेल और एलपीजी का भरोसा

रूस ने स्पष्ट किया है कि वह भारत को कच्चा तेल और एलएनजी की सप्लाई रुकने नहीं देगा। मध्य पूर्व में युद्ध के कारण ऊर्जा सप्लाई में लंबे समय तक रुकावट की भारी आशंका है। भारत अपनी तेल जरूरतों का लगभग नब्बे प्रतिशत हिस्सा दूसरे देशों से आयात करता है। ऐसे में मास्को का यह बयान भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बड़ा सुरक्षा कवच बन गया है।

मार्च में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा रूसी तेल आयात

होर्मुज रूट बंद होने के खतरे को भांपते हुए भारत ने अपनी तेल खरीद काफी तेज कर दी है। एक रिपोर्ट के मुताबिक मार्च महीने में भारत ने रूस से रिकॉर्ड स्तर पर कच्चा तेल खरीदा है। यह रूस से तेल आयात के मामले में पिछले तीन सालों का सबसे उच्चतम स्तर बन गया है। भारत ने मार्च में औसतन करीब बीस लाख बैरल तेल हर दिन रूस से मंगाया है। देश अपनी ऊर्जा जरूरतों को किसी भी कीमत पर पूरी तरह सुरक्षित रखना चाहता है।

भारत के लिए क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य?

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण और व्यस्त तेल मार्ग माना जाता है। सऊदी अरब, इराक और यूएई से आने वाला कच्चा तेल इसी संकरे रास्ते से होकर भारत पहुंचता है। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के कारण इस रास्ते से जहाजों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है। इस नाकेबंदी से पूरी दुनिया में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ने का बड़ा खतरा पैदा हो गया है।

रियायती दामों पर प्राकृतिक गैस की पेशकश

रूस संकट की इस मुश्किल घड़ी में केवल कच्चा तेल ही नहीं बल्कि प्राकृतिक गैस भी दे रहा है। जानकारी के अनुसार रूस ने भारत को सस्ती दरों पर एलएनजी देने का शानदार ऑफर दिया है। रूस की तरफ से गैस पर करीब चालीस फीसदी तक की भारी छूट दी जा रही है। हाल ही में रूसी तेल खरीद पर मिली अमेरिकी छूट की मियाद पूरी हो गई है। इसके बावजूद अधिकारियों का मानना है कि रूस से यह फायदेमंद तेल खरीद लगातार जारी रहेगी।

वैश्विक दबाव के बावजूद भारत का कड़ा रुख

भारत सरकार ने वैश्विक मंचों पर अपना रुख हमेशा पूरी तरह से स्पष्ट रखा है। सरकार की पहली और सबसे बड़ी प्राथमिकता अपने नागरिकों को सस्ती ऊर्जा उपलब्ध कराना है। अधिकारी साफ कह चुके हैं कि कच्चा तेल वहीं से खरीदा जाएगा जहां से वह सस्ता मिलेगा। रूस और भारत की यह रणनीतिक साझेदारी इस वैश्विक संकट में और भी ज्यादा मजबूत होकर उभरी है। रूस का यह कदम भारत को भविष्य के किसी भी ऊर्जा संकट से पूरी तरह सुरक्षित रखेगा।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
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