ईरान में महासंकट: अमेरिका से युद्ध के बीच 10 लाख लोगों की जा सकती है नौकरी, टेक कंपनियों में मची हाहाकार

Iran News: पश्चिम एशिया में जारी अमेरिका-ईरान युद्ध ने अब ईरान के आर्थिक ढांचे को पूरी तरह हिलाकर रख दिया है। युद्ध और कड़े आर्थिक प्रतिबंधों के कारण ईरान के रोजगार बाजार में भीषण गिरावट दर्ज की जा रही है। पिछले दो महीनों में हालात इतने बिगड़ गए हैं कि निजी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर छंटनी शुरू हो गई है। तकनीकी और ई-कॉमर्स कंपनियां सबसे अधिक प्रभावित हुई हैं। लाखों परिवारों के सामने अब रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

इंटरनेट पर पाबंदी से तकनीकी क्षेत्र में आया भूकंप

ईरान सरकार ने युद्ध शुरू होने से ठीक पहले देश भर में इंटरनेट सेवाओं पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए थे। इस फैसले ने ईरान के उभरते तकनीकी उद्योग की कमर तोड़ दी है। तेहरान की बड़ी कंपनियों में काम करने वाले सॉफ्टवेयर इंजीनियर और डिजाइनर्स अब बेरोजगार हो रहे हैं। काम करने की स्थितियां असंभव होने के कारण कई कंपनियों ने मार्च महीने से ही अपने कर्मचारियों को निकालना शुरू कर दिया है। इससे डिजिटल इकोनॉमी पूरी तरह ठप पड़ गई है।

नौकरियों पर मंडराया खतरा और औद्योगिक ढांचे की तबाही

युद्ध के दौरान हुए हवाई हमलों में ईरान के महत्वपूर्ण औद्योगिक प्रतिष्ठानों और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। ईरानी अधिकारी गुलाम हुसैन मोहम्मदी के अनुसार, मौजूदा संकट से लगभग 10 लाख नौकरियां सीधे तौर पर खत्म हो सकती हैं। इसके अलावा 20 लाख लोग इस मंदी से अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित होंगे। युद्धविराम के बावजूद अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी ने तेल निर्यात को रोक दिया है। इससे सरकारी खजाने और निजी निवेश दोनों पर बुरा असर पड़ा है।

जॉब मार्केट में मची लूट और बेरोजगारी का रिकॉर्ड

ईरान के प्रमुख जॉब पोर्टल्स पर नौकरी तलाशने वालों की भीड़ अचानक बढ़ गई है। 25 अप्रैल को एक ही दिन में रिकॉर्ड 3.18 लाख बायोडाटा जमा किए गए। यह आंकड़ा पिछले सभी रिकॉर्ड्स से 50 प्रतिशत ज्यादा है। लोग किसी भी तरह काम पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि युद्ध से पहले ही ईरान महंगाई और गिरती मुद्रा से जूझ रहा था। अब युद्ध ने इस संकट को कई गुना ज्यादा बढ़ा दिया है।

दिग्गज कंपनियां बंद और करोड़ों डॉलर का आर्थिक नुकसान

ईरान की दिग्गज ई-कॉमर्स कंपनी ‘डिजीकाला’ ने हाल ही में 200 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है। वहीं, चर्चित स्टार्टअप ‘कामवा’ ने अपना पूरा कारोबार समेटने की घोषणा कर दी है। तकनीकी समूहों का अनुमान है कि इंटरनेट बंदी के कारण ईरान को हर दिन करीब आठ करोड़ डॉलर का भारी नुकसान हो रहा है। निजी क्षेत्र के निवेशकों में डर का माहौल है। भ्रष्टाचार और वैश्विक प्रतिबंधों ने भविष्य की उम्मीदों को और ज्यादा धुंधला कर दिया है।

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