Uttarakhand News: देवभूमि उत्तराखंड में बढ़ते तापमान और भीषण गर्मी के बीच जंगलों में आग लगने की घटनाओं ने विकराल रूप धारण कर लिया है। प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में अब तक वनाग्नि की 208 घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं, जिससे करीब 130.27 हेक्टेयर वन क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित हुआ है। सबसे गंभीर स्थिति चारधाम यात्रा मार्ग पर बनी हुई है, जहां से रोजाना लाखों श्रद्धालु गुजर रहे हैं। वन विभाग ने आग पर काबू पाने के लिए अतिरिक्त टीमों को अलर्ट मोड पर रखा है।
चारधाम यात्रा मार्ग पर संकट: बद्रीनाथ-केदारनाथ में सबसे ज्यादा असर
आंकड़ों के अनुसार, चारधाम यात्रा रूट से जुड़े फॉरेस्ट डिवीजन इस समय आग की चपेट में सबसे ज्यादा हैं। बद्रीनाथ-गोपेश्वर फॉरेस्ट डिवीजन में सबसे अधिक 57 स्थानों पर आग लगी है, जिससे 17.54 हेक्टेयर जंगल जल चुका है। वहीं, रुद्रप्रयाग में 31 और केदारनाथ वाइल्डलाइफ डिवीजन में 20 घटनाओं ने वन संपदा को भारी नुकसान पहुंचाया है। मुख्य वन संरक्षक सुशांत पटनायक के मुताबिक, इन संवेदनशील रास्तों पर क्विक रिस्पॉन्स टीमें तैनात की गई हैं ताकि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
कुमाऊं और गढ़वाल के डिवीजनों में जल रही वन संपदा
गढ़वाल के साथ-साथ कुमाऊं क्षेत्र के जंगलों में भी आग तेजी से फैल रही है। पिथौरागढ़ में 14 स्थानों पर आग लगने से 11.25 हेक्टेयर जंगल राख हो गया है। इसके अलावा उत्तरकाशी, चकराता और कालसी जैसे क्षेत्रों में बांज, बुरांश और देवदार के घने जंगल आग की भेंट चढ़ रहे हैं। चकराता वन प्रभाग के सहिया क्षेत्र में पिछले दो दिनों से उठते धुएं के गुबार ने स्थानीय प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। आग को बुझाने के लिए स्थानीय पुलिस और फायर सर्विस की मदद भी ली जा रही है।
वनाग्नि के आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता, 15 फरवरी से जारी है सिलसिला
उत्तराखंड में फॉरेस्ट फायर सीजन आधिकारिक रूप से 15 फरवरी से शुरू होता है, लेकिन कम बारिश के कारण दिसंबर से ही कुछ इलाकों में आग सुलगने लगी थी। 15 फरवरी से 27 फरवरी 2026 के बीच रिजर्व फॉरेस्ट क्षेत्रों में 126 और सिविल सोयम क्षेत्रों में 82 स्थानों पर आग रिकॉर्ड की गई। पौड़ी, टिहरी और अल्मोड़ा जैसे जिलों में भी हालात चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। वन विभाग लगातार सेटेलाइट के जरिए आग की निगरानी कर रहा है, ताकि जनहानि और वन्यजीवों को बचाया जा सके।
मौसम विभाग का ऑरेंज अलर्ट: क्या बारिश से मिलेगी राहत?
जंगलों की आग के बीच मौसम विभाग ने 28 और 29 अप्रैल को देहरादून, नैनीताल और चमोली समेत कई जिलों में तेज हवाओं के साथ बारिश और ओलावृष्टि का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। वन विभाग को उम्मीद है कि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बारिश होने से आग पर प्राकृतिक रूप से काबू पाया जा सकेगा। हालांकि, तेज हवाओं के चलने से आग के और ज्यादा फैलने का खतरा भी बना हुआ है। मैदानी इलाकों में हीट वेव को लेकर भी प्रशासन ने येलो अलर्ट जारी किया है, जिससे चुनौती और बढ़ गई है।
