Bareilly News: उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में निजी स्कूलों की मनमानी और फीस वृद्धि पर अंकुश लगाने के लिए प्रशासन ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। सोमवार को जिलाधिकारी अविनाश सिंह की अध्यक्षता में हुई जिला शुल्क नियामक समिति की बैठक में सत्र 2026-27 के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए गए। अब स्कूल मनमाने ढंग से फीस नहीं बढ़ा सकेंगे और उन्हें ‘उत्तर प्रदेश स्ववित्त पोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क विनियम) अधिनियम, 2018’ के दायरे में रहकर ही काम करना होगा।
फीस वृद्धि की सीमा तय और पारदर्शिता अनिवार्य
नए नियमों के अनुसार, सत्र 2026-27 के लिए स्कूल पिछले वर्ष की तुलना में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) प्लस पांच प्रतिशत से अधिक फीस नहीं बढ़ा सकेंगे। इससे अधिक वसूली को कानून का उल्लंघन माना जाएगा। साथ ही, सभी स्कूलों को सत्र शुरू होने से ठीक 60 दिन पहले अपनी आधिकारिक वेबसाइट और सूचना बोर्ड पर फीस का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक करना होगा। इस कदम का मुख्य उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था में पूर्ण पारदर्शिता लाना और अभिभावकों को आर्थिक शोषण से बचाना है।
ड्रेस और किताबों की मोनोपॉली पर प्रशासन का कड़ा प्रहार
अभिभावकों को अक्सर विशेष दुकानों से ही महंगी किताबें और यूनिफार्म खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है। प्रशासन ने इस पर पूर्ण प्रतिबंध लगाते हुए कहा है कि कोई भी विद्यालय किसी छात्र को विशिष्ट दुकान से सामान खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकता। इसके अलावा, स्कूल अब पांच साल से पहले अपनी यूनिफॉर्म में बदलाव नहीं कर पाएंगे। यदि बदलाव जरूरी है, तो इसके लिए समिति से लिखित अनुमति लेनी होगी। पठन-पाठन में एनसीईआरटी (NCERT) पुस्तकों को प्राथमिकता देना अनिवार्य होगा।
स्वीमिंग पूल के लिए सुरक्षा मानक और अनिवार्य कोच
बैठक में छात्र सुरक्षा को लेकर भी कड़े निर्देश दिए गए हैं। बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के स्कूलों में स्वीमिंग पूल का संचालन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। जहां अनुमति मिली है, वहां सुरक्षा के कड़े इंतजाम करने होंगे। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बालकों के लिए पुरुष कोच और बालिकाओं के लिए महिला कोच की नियुक्ति अनिवार्य है। सुरक्षा मानकों में लापरवाही बरतने वाले स्कूलों पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी, जिससे बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
शिकायत के लिए हेल्पलाइन और भारी जुर्माने का प्रावधान
अभिभावकों की सुविधा के लिए प्रशासन ने ई-मेल (rmsa.bareilly@gmail.com) और व्हाट्सएप नंबर (9454457296) जारी किया है। नियमों की अनदेखी पर पहली बार में 1 लाख रुपये और दूसरी बार में 5 लाख रुपये का जुर्माना लगेगा। यदि स्कूल तीसरी बार दोषी पाया जाता है, तो उसकी मान्यता रद्द करने की संस्तुति की जाएगी। सभी विद्यालयों को एक सप्ताह के भीतर पिछले 5 वर्षों की फीस संरचना का पूरा डेटा जिला विद्यालय निरीक्षक को सौंपने का अल्टीमेटम दिया गया है।
