अमेरिका में नौकरी छिनने का डर? ज़ोहो के संस्थापक श्रीधर वेंबू ने भारतीय पेशेवरों से कहा- ‘घर लौट आओ’

New Delhi News: भारतीय बहुराष्ट्रीय सॉफ्टवेयर कंपनी ज़ोहो के सह-संस्थापक श्रीधर वेंबू ने अमेरिका में काम कर रहे भारतीय पेशेवरों से स्वदेश लौटने की भावुक अपील की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक खुला पत्र साझा किया। इस पत्र में उन्होंने लिखा कि भारत माता को आपकी प्रतिभा और तकनीकी नेतृत्व की सख्त जरूरत है। वेंबू ने कहा कि भारतीय युवाओं को आपके अनुभव और मार्गदर्शन की आवश्यकता है। यह अपील एच-1बी वीजा संकट के बीच आई है।

एच-1बी वीजा संकट और बढ़ता दबाव

अमेरिका में इस समय एच-1बी वीजा नियमों को लेकर काफी सख्ती देखने को मिल रही है। रिपब्लिकन सांसदों ने एक नया विधेयक पेश किया है। इस विधेयक में एच-1बी प्रोग्राम को अगले तीन साल तक निलंबित करने की मांग उठी है। अमेरिकी प्रौद्योगिकी कंपनियां विदेशी पेशेवरों को नौकरी देने के लिए इसी वीजा का इस्तेमाल करती हैं। नियमों में बदलाव की आशंका से वहां रहने वाले भारतीयों में डर का माहौल है। वेंबू का बयान बहुत अहम है।

वेंबू ने याद किया अपना पुराना संघर्ष

श्रीधर वेंबू ने अपने पत्र में सैंतीस साल पहले के अमेरिका प्रवास को भी याद किया है। उन्होंने बताया कि उस वक्त उनके पास बिल्कुल पैसे नहीं थे। लेकिन उनके पास बेहतरीन शिक्षा और समृद्ध भारतीय सांस्कृतिक विरासत मौजूद थी। वेंबू ने भारतीय पेशेवरों की सफलता की जमकर तारीफ की। उन्होंने लिखा कि अमेरिका हमारे लिए काफी अच्छा साबित हुआ है। हमें इस देश के प्रति हमेशा आभारी रहना चाहिए क्योंकि कृतज्ञता ही सच्ची भारतीय संस्कृति है।

अमेरिकी राजनीति और भारतीयों की स्थिति

ज़ोहो संस्थापक ने चिंता जताते हुए कहा कि कई अमेरिकी लोग भारतीयों से नाराज हैं। उनका मानना है कि भारतीय लोग अमेरिका में आकर उनकी नौकरियां छीन रहे हैं। वेंबू के अनुसार अमेरिकी राजनीति में भारतीय समुदाय केवल एक मूक दर्शक बनकर रह गया है। उनके पास वामपंथी या दक्षिणपंथी विचारधारा में से किसी एक को चुनने की मजबूरी है। लेकिन अमेरिका में इन दोनों में से कोई भी राजनीतिक दल विदेशी भारतीयों के पूर्ण सम्मान की गारंटी नहीं देता।

भारत की तकनीकी क्षमता पर टिका भविष्य

श्रीधर वेंबू ने स्पष्ट किया कि दुनियाभर में भारतीयों का सच्चा सम्मान उनकी तकनीकी क्षमता पर निर्भर करता है। उन्होंने अपनी पोस्ट में साफ लिखा कि अगर भारत गरीब देश बना रहता है तो वामपंथी हमें दया भाव से झूठे नैतिक उपदेश देंगे। वहीं कट्टरपंथी दक्षिणपंथी लोग हमें तिरस्कार और नफरत की नजर से देखेंगे। इसलिए हमें किसी तरह के भ्रम में नहीं रहना चाहिए। आज वक्त की बड़ी मांग है कि प्रतिभाशाली भारतीय वापस लौटकर स्वदेश का विकास करें।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
/ month
placeholder text

Hot this week

Topics

Related Articles

Popular Categories