New Delhi News: भारत के मोस्ट वांटेड और अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के ड्रग्स साम्राज्य को एक बड़ी चोट पहुंची है। करीब 5000 करोड़ रुपये के नशीले पदार्थों के काले कारोबार का मास्टरमाइंड सलीम डोला तुर्किये में पकड़ा गया है। उसे राष्ट्रीय खुफिया संगठन और वहां की स्थानीय पुलिस इकाइयों के एक जॉइंट ऑपरेशन में गिरफ्तार किया गया। भारतीय एजेंसियां अब डोला के प्रत्यर्पण (Extradition) की तैयारी में जुट गई हैं, ताकि दाऊद सिंडिकेट की कमर पूरी तरह तोड़ी जा सके।
तुर्किये से यूएई और फिर भारत लाने की योजना
चूंकि भारत का तुर्किये के साथ कोई सीधा प्रत्यर्पण समझौता नहीं है, इसलिए भारतीय एजेंसियां संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के साथ मिलकर रणनीति बना रही हैं। सलीम डोला के पास यूएई का पासपोर्ट है, जिसके आधार पर उसे पहले यूएई प्रत्यर्पित कराया जाएगा। इसके बाद भारतीय जांच एजेंसियां यूएई प्रशासन से समन्वय कर उसे भारत लाने की प्रक्रिया शुरू करेंगी। अधिकारियों को पूरा भरोसा है कि डोला को जल्द ही भारतीय कानून के शिकंजे में लाया जाएगा।
इंटरपोल के रेड कॉर्नर नोटिस पर हुई कार्रवाई
सलीम डोला को सीबीआई (CBI) के अनुरोध पर जारी किए गए इंटरपोल रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर हिरासत में लिया गया है। मुंबई पुलिस को लंबे समय से डोला की तलाश थी और वह नशीले पदार्थों की तस्करी के दर्जनों मामलों में मुख्य आरोपी है। उसकी गिरफ्तारी से मुंबई, गुजरात और दिल्ली जैसे बड़े शहरों में सक्रिय दाऊद गिरोह की गतिविधियों पर गहरा असर पड़ेगा। एजेंसियां इसे आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में एक बड़ी उपलब्धि मान रही हैं।
ISI की फंडिंग और आतंकी नेटवर्क पर पड़ेगा असर
खुफिया ब्यूरो (IB) के अधिकारियों का मानना है कि डोला की गिरफ्तारी पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) के लिए भी एक बड़ा आर्थिक झटका है। ड्रग्स सिंडिकेट से होने वाली काली कमाई का एक बड़ा हिस्सा भारत में सक्रिय आतंकी संगठनों की फंडिंग के लिए इस्तेमाल किया जाता था। डोला के पकड़े जाने से अब सीमा पार से होने वाली इस फंडिंग में भारी कमी आएगी। पिछले साल डोला के बेटे ताहिर को भी यूएई से भारत लाया गया था।
छोटा शकील का करीबी और ड्रग्स का पुराना खिलाड़ी
1966 में मुंबई में जन्मा सलीम डोला बहुत छोटी उम्र में ही अंडरवर्ल्ड के संपर्क में आ गया था। उसने दाऊद के सबसे भरोसेमंद गुर्गे छोटा शकील के साथ मिलकर काम शुरू किया था। शुरुआत में गुटखा सप्लाई करने वाला डोला धीरे-धीरे मारिजुआना और सिंथेटिक ड्रग्स का बड़ा सप्लायर बन गया। साल 2012 और 2018 में गिरफ्तारी के बाद जेल जाने के बावजूद वह जमानत मिलते ही यूएई फरार हो गया था, जहां से वह अपना सिंडिकेट चला रहा था।
