Himachal Pradesh News: ऊना जिले के हरोली क्षेत्र में स्टोन क्रशर यूनिट द्वारा नियमों की धज्जियां उड़ाकर किए गए अंधाधुंध खनन पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। नंगल खुर्द गांव में पर्यावरण को पहुंचाए गए भारी नुकसान का संज्ञान लेते हुए ट्रिब्यूनल ने एक उच्चस्तरीय संयुक्त कमेटी का गठन कर दिया है। यह कमेटी मौके पर जाकर जमीनी हकीकत की जांच करेगी और देखेगी कि नियमों का कितना उल्लंघन हुआ है।
88 हजार की अनुमति और खोद डाला 3.78 लाख टन
हरोली की इस स्टोन क्रशर यूनिट पर बेहद चौंकाने वाले आरोप लगे हैं। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, यूनिट को दो साल के लिए महज 88,000 मीट्रिक टन खनन की मंजूरी मिली थी। लेकिन मुनाफे के लालच में यहां लगभग 3.78 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा पत्थर और रेत निकाल लिया गया। एनजीटी द्वारा गठित कमेटी अब इस बात की कड़ाई से तफ्तीश करेगी कि पर्यावरणीय मंजूरी की शर्तों को दरकिनार कर इतना विशाल खनन कैसे संभव हुआ।
खेतों को बना दिया 100 फीट गहरा जानलेवा गड्ढा
आरोप है कि खनन माफिया ने क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए करीब 100 फीट गहराई तक खोदाई कर दी है। इसमें सबसे दुखद पहलू यह है कि करीब 27 कनाल निजी कृषि भूमि को भी नहीं बख्शा गया। गहरी खोदाई के कारण उपजाऊ जमीन अब पूरी तरह तबाह हो चुकी है। स्थानीय ग्रामीणों ने डर जताया है कि मानसून के दौरान इन गहरे गड्ढों में जलभराव होने से न केवल पर्यावरण बिगड़ेगा, बल्कि जान-माल का बड़ा नुकसान भी हो सकता है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की संदिग्ध भूमिका पर सवाल
इस पूरे अवैध खेल में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्यप्रणाली भी अब जांच के घेरे में है। आरोप लग रहे हैं कि निरीक्षण के दौरान भारी कमियां और खामियां पाए जाने के बावजूद विभाग ने यूनिट को बंद करने के बजाय संचालन की अनुमति जारी रखी। एनजीटी ने इस मिलीभगत की संभावनाओं को देखते हुए जांच टीम में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और पर्यावरण मंत्रालय के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया है ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।
8 सप्ताह में मांगी रिपोर्ट, बड़ी कार्रवाई की तैयारी
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने सख्त लहजे में निर्देश दिए हैं कि जांच समिति अपनी विस्तृत रिपोर्ट अगले 8 सप्ताह के भीतर पेश करे। ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया है कि यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो न केवल यूनिट के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी, बल्कि पर्यावरणीय क्षति की भरपाई भी संबंधित पक्षों से ही की जाएगी। हरोली के स्थानीय लोगों ने मांग की है कि दोषियों को जेल भेजा जाए और भविष्य के लिए खनन पर सख्त पाबंदी लगाई जाए।
