Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश के सबसे प्रतिष्ठित अस्पताल आईजीएमसी (IGMC) शिमला से एक बेहद विचलित करने वाली घटना सामने आई है। अस्पताल के स्त्री रोग विभाग की माइनर ओटी (OT) में मंगलवार को महिला मरीजों के उपचार के दौरान उनकी निजता का सरेआम उल्लंघन हुआ। यहां ओटी में पर्दे इस कदर अव्यवस्थित ढंग से लगे थे कि बाहर गैलरी में बैठे मरीजों और तीमारदारों को अंदर चल रही जांच और इलाज साफ नजर आ रहा था। इस लापरवाही ने अस्पताल प्रशासन की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
महिला कर्मचारी के दखल के बाद बंद हुआ दरवाजा
हैरानी की बात यह है कि अस्पताल के जिम्मेदार कर्मचारी इस गंभीर चूक से बेखबर थे। काफी देर तक महिला मरीजों को इसी असहज स्थिति में उपचार दिया गया। जब एक वरिष्ठ महिला कर्मचारी की नजर इस अव्यवस्था पर पड़ी, तो उन्होंने तुरंत कड़ा संज्ञान लिया और ओटी का दरवाजा बंद करने के निर्देश दिए। स्वास्थ्य मानकों के अनुसार, महिला मरीजों के उपचार के दौरान उनकी गोपनीयता और प्राइवेसी बनाए रखना अनिवार्य है। इस तरह की लापरवाही पर डॉक्टरों और संबंधित स्टाफ के खिलाफ कानूनी कार्रवाई तक का प्रावधान है।
KNH से शिफ्टिंग के बाद चरमराई स्वास्थ्य व्यवस्था
शिमला के कमला नेहरू अस्पताल (KNH) से 16 अप्रैल को स्त्री रोग विभाग को आईजीएमसी शिफ्ट किया गया था। सरकार के इस फैसले के बाद से ही महिला मरीजों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। आईजीएमसी में बुनियादी सुविधाओं का भारी अभाव है। केएनएच में जहां महिलाओं को एक ही छत के नीचे सारी जांच और रिपोर्ट्स मिल जाती थीं, वहीं आईजीएमसी में छोटे से टेस्ट के लिए भी मरीजों को पूरा दिन भटकना पड़ रहा है। सुविधाओं की कमी के कारण अब आईजीएमसी में मरीजों की संख्या भी घटने लगी है।
मरीजों की घटती संख्या और डॉक्टरों की भारी कमी
आंकड़ों की मानें तो केएनएच में प्रतिदिन लगभग 300 महिलाएं इलाज के लिए पहुंचती थीं, लेकिन आईजीएमसी में शिफ्ट होने के बाद यह ओपीडी सिमटकर 100 से भी कम रह गई है। अस्पताल में पर्याप्त डॉक्टरों की कमी और अव्यवस्था से तंग आकर महिलाएं अब निजी अस्पतालों या दीन दयाल उपाध्याय (रिपन) अस्पताल का रुख कर रही हैं। केएनएच में अब केवल प्रसव (Delivery) की सुविधा है, लेकिन उसके बाद किसी भी जटिलता के लिए मरीजों को आईजीएमसी के चक्कर काटने को मजबूर होना पड़ रहा है।
प्रशासन ने दिए जांच और सुधार के कड़े निर्देश
इस घटना के बाद आईजीएमसी प्रशासन हरकत में आ गया है। अस्पताल के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा है कि इस मामले में संबंधित विभागाध्यक्ष (HOD) से जवाब-तलब किया जाएगा। डॉक्टरों और स्टाफ को सख्त हिदायत दी गई है कि भविष्य में इलाज के दौरान मरीजों की निजता के साथ कोई समझौता न हो और सभी मेडिकल प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन किया जाए। हालांकि, स्थानीय जनता और मरीजों ने मांग की है कि केवल निर्देशों से काम नहीं चलेगा, बल्कि अस्पताल में बुनियादी ढांचे और मैनपावर को तुरंत दुरुस्त किया जाए।
