New Delhi News: देश के सभी पुलिस थानों में सीसीटीवी (CCTV) कैमरे लगाने के आदेश पर अमल न होने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अब कड़ा रुख अख्तियार किया है। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने मंगलवार को आदेश दिया कि राज्यों द्वारा इस मद में फंड के इस्तेमाल की समीक्षा के लिए आगामी 6 मई को एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाई जाए। न्यायालय ने वरिष्ठ अधिवक्ता और अमिकस क्यूरी सिद्धार्थ देव को निर्देश दिया है कि वे केंद्र, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ इस विषय पर गहन विचार-विमर्श करें।
गृह सचिवों की मौजूदगी में फंड के उपयोग का होगा ऑडिट
सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि अमिकस क्यूरी द्वारा आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में केंद्रीय गृह सचिव या उनके द्वारा नामित प्रतिनिधि का होना अनिवार्य है। इसके साथ ही सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के गृह सचिव भी इस मंथन का हिस्सा बनेंगे। अदालत ने यह कदम तब उठाया जब वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ देव ने न्यायालय को सूचित किया कि केंद्र से पर्याप्त राशि मिलने के बावजूद राज्यों द्वारा फंड के उपयोग की स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही है।
केंद्र और राज्यों के बीच फंडिंग का गणित आया सामने
सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि पुलिस थानों में कैमरे लगाने के लिए केंद्र शासित प्रदेशों में केंद्र सरकार 100 प्रतिशत फंड मुहैया कराती है। वहीं, पहाड़ी राज्यों के लिए यह हिस्सेदारी 90 प्रतिशत और अन्य राज्यों के लिए 60 प्रतिशत निर्धारित की गई है। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर कार्य की धीमी गति पर पीठ ने सवाल उठाया। जस्टिस विक्रम नाथ ने तीखी टिप्पणी करते हुए पूछा कि आखिर राज्यों से फंड के उपयोग को लेकर कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया क्यों नहीं मिल रही है?
मानवाधिकारों की सुरक्षा के लिए 2018 में दिया गया था आदेश
पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने का मुख्य उद्देश्य हिरासत में होने वाले मानवाधिकारों के उल्लंघन और पुलिसिया बर्बरता को रोकना है। सुप्रीम कोर्ट ने सबसे पहले साल 2018 में यह ऐतिहासिक आदेश दिया था। हालांकि, वर्षों बीत जाने के बाद भी कई राज्यों में इसका पूर्ण कार्यान्वयन नहीं हो पाया है। केंद्र सरकार ने हाल ही में सात अप्रैल को आश्वासन दिया था कि तकनीकी और वित्तीय बाधाओं को दो सप्ताह के भीतर सुलझा लिया जाएगा, जिस पर अदालत अब सक्रियता दिखा रही है।
13 मई को होगी अगली सुनवाई, पेश करनी होगी विस्तृत रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि 6 मई की बैठक के नतीजों और राज्यों की प्रगति पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाए। इस मामले की अगली सुनवाई 13 मई को तय की गई है, जिसमें न्यायालय रिपोर्ट का अध्ययन कर आगे के दिशा-निर्देश जारी करेगा। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि पुलिस थानों में नाइट विजन और ऑडियो रिकॉर्डिंग वाले आधुनिक कैमरों की स्थापना से कानून व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी और आम नागरिकों का पुलिस प्रणाली पर भरोसा और अधिक मजबूत होगा।
अदालती सख्ती से पुलिस प्रणाली में सुधार की नई उम्मीद
अदालत का यह फैसला राज्यों के लिए एक चेतावनी है कि वे पुलिस सुधारों और मानवाधिकारों से जुड़े मुद्दों को हल्के में नहीं ले सकते। बार-बार समय सीमा बीतने के बाद भी सीसीटीवी लगाने में विफल रहने वाले राज्यों पर कोर्ट सख्त जुर्माना या अन्य कार्रवाई भी कर सकता है। आगामी बैठक के बाद यह स्पष्ट हो जाएगा कि किस राज्य ने आवंटित राशि का कितना प्रतिशत हिस्सा थानों को सुरक्षित बनाने में खर्च किया है। फिलहाल, सभी की निगाहें 13 मई की सुनवाई पर टिकी हैं।
