विपक्ष ने छीना महिलाओं का हक? सिरसा ने दिल्ली विधानसभा में खोला मोर्चा, बोले- इतिहास कभी माफ नहीं करेगा!

Delhi News: दिल्ली विधानसभा के विशेष सत्र में मंगलवार को ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पर चर्चा के दौरान सियासी पारा चढ़ गया। पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की आधी आबादी को संवैधानिक हक देने का ऐतिहासिक प्रयास हुआ। सिरसा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और समाजवादी पार्टी जैसे दलों ने इस प्रक्रिया में बाधा डाली। उनके अनुसार, यह विधेयक केवल आरक्षण नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र को सशक्त बनाने का महान संकल्प है।

विपक्ष के विरोध के कारण दशकों तक अटका रहा विधेयक

सिरसा ने सदन में महिला आरक्षण विधेयक के लंबे और चुनौतीपूर्ण सफर का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि 1996 से लेकर 2010 तक कई बार इसे आगे बढ़ाने के प्रयास हुए। अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने चार बार इसे सदन में पेश किया, लेकिन विपक्ष ने हर बार इसे रोका। मंत्री ने कहा कि 2010 में राज्यसभा से पारित होने के बावजूद कांग्रेस ने इसे लोकसभा में नहीं पहुंचने दिया। उन्होंने विपक्ष की हिचकिचाहट और राजनीतिक स्वार्थ को महिला अधिकारों के साथ बड़ा अन्याय करार दिया।

परिसीमन राजनीतिक विकल्प नहीं बल्कि संवैधानिक जरूरत

चर्चा के दौरान सिरसा ने परिसीमन (डिलिमिटेशन) के मुद्दे पर विपक्ष द्वारा फैलाए जा रहे भ्रम को भी दूर किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह एक संवैधानिक आवश्यकता है, कोई राजनीतिक विकल्प नहीं। देश की जनसंख्या 50 करोड़ से बढ़कर 140 करोड़ के पार पहुंच गई है। ऐसे में हर नागरिक के वोट की समान ताकत सुनिश्चित करना जरूरी है। परिसीमन से किसी भी राज्य के साथ भेदभाव नहीं होगा। बल्कि यह देशभर में महिलाओं के समान और प्रभावी प्रतिनिधित्व का मार्ग प्रशस्त करेगा।

भाजपा ने केवल भाषण नहीं बल्कि नेतृत्व देकर पेश की मिसाल

सिरसा ने भारतीय जनता पार्टी की महिलाओं के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का उदाहरण पेश किया। उन्होंने सुषमा स्वराज, आनंदीबेन पटेल और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु जैसी दिग्गज महिला नेताओं का नाम लिया। सिरसा ने कहा कि भाजपा ने महिलाओं को केवल घोषणाओं में नहीं, बल्कि सरकार की मुख्यधारा में जगह दी है। पंचायतों में 50 प्रतिशत आरक्षण के चलते आज लाखों महिलाएं देश के विकास की नीति तय कर रही हैं। यह दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक महिला सहभागिता मॉडल बनकर उभरा है।

पंजाब का गौरवशाली इतिहास और गुरुबाणी का संदेश

पर्यावरण मंत्री ने पंजाब की ऐतिहासिक भूमिका का जिक्र करते हुए नारी सम्मान पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि 1925 के एसजीपीसी अधिनियम ने भारत की धरती पर सबसे पहले महिलाओं को मतदान का अधिकार दिया था। उन्होंने गुरु नानक देव जी की पवित्र पंक्तियों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति सदैव नारी के प्रति नतमस्तक रही है। सिरसा ने अंत में चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जो लोग महिला अधिकारों के साथ राजनीति कर रहे हैं, उन्हें देश की बहन-बेटियां कभी माफ नहीं करेंगी।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
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