दिल्ली विधानसभा का वह ‘खूनी’ राज: महात्मा गांधी की मौजूदगी और 75,000 सैनिकों के बलिदान की अनकही कहानी!

Delhi News: दिल्ली विधानसभा ने मंगलवार को सुर साम्राज्ञी आशा भोसले और प्रथम विश्व युद्ध में शहीद हुए 75,000 वीर भारतीय सैनिकों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी। विधानसभा के विशेष सत्र को संबोधित करते हुए अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने इस सदन के ऐतिहासिक और औपनिवेशिक अतीत को याद किया। उन्होंने बताया कि जिस हॉल में आज जन प्रतिनिधि बैठते हैं, वहां 108 साल पहले ब्रिटिश वायसराय ने युद्ध सम्मेलन किया था। इस आयोजन ने न केवल भारतीय सैनिकों की भर्ती का मार्ग प्रशस्त किया, बल्कि देश के स्वाधीनता संग्राम की दिशा भी बदल दी थी।

गांधीजी का अटूट विश्वास और अंग्रेजों का बड़ा विश्वासघात

अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने सदन को बताया कि 28 अप्रैल 1918 को तत्कालीन वायसराय लॉर्ड चेम्सफोर्ड ने इसी चैंबर में ऐतिहासिक युद्ध सम्मेलन बुलाया था। इस सम्मेलन में महात्मा गांधी स्वयं उपस्थित थे। गांधीजी ने इस उम्मीद में ब्रिटिश साम्राज्य का समर्थन किया था कि युद्ध के बाद भारत को ईनाम में ‘आजादी’ मिलेगी। हालांकि, इतिहास इस बात का गवाह है कि अंग्रेजों ने भारत के इस विश्वास के साथ छल किया। बलिदान के बदले भारत को रॉलेट एक्ट और जलियांवाला बाग जैसे भयानक नरसंहार मिले।

विदेशी धरती पर 75 हजार भारतीय जवानों का सर्वोच्च बलिदान

प्रथम विश्व युद्ध के दौरान लगभग 13 लाख भारतीय सैनिकों ने ब्रिटिश झंडे तले युद्ध लड़ा था। फ्लैंडर्स के मैदानों से लेकर मेसोपोटामिया तक, भारतीय वीरों ने अपना पराक्रम दिखाया। इनमें से 74 हजार से अधिक सैनिकों ने विदेशी जमीन पर अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि यह हमारा नैतिक कर्तव्य है कि हम उन अनाम योद्धाओं को याद करें। एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में भारत आज उन वीर आत्माओं के प्रति अपनी कृतज्ञता प्रकट कर उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित करता है।

भारतीय संसदीय इतिहास की जन्मस्थली है पुराना सचिवालय

ई. मोंटेग्यू थॉमस द्वारा डिजाइन किया गया यह सदन भारत के संसदीय इतिहास का महत्वपूर्ण केंद्र है। 27 जनवरी 1913 को इसी चैंबर में पहली बार केंद्रीय विधायी परिषद की बैठक आयोजित हुई थी। लाला लाजपत राय, पंडित मदन मोहन मालवीय और गोपाल कृष्ण गोखले जैसे महान स्वतंत्रता सेनानियों ने यहीं से देश को नई दिशा दी। अध्यक्ष ने कहा कि जिन दीवारों ने कभी साम्राज्यवादी वायसराय को सुना था, आज वे जनता के प्रतिनिधियों की आवाज सुन रही हैं। यही हमारे लोकतंत्र की विजय है।

युद्ध सम्मेलन की वर्षगांठ पर संगोष्ठी का भव्य आयोजन

इस ऐतिहासिक युद्ध सम्मेलन की 108वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में दिल्ली विधानसभा एक विशेष कार्यक्रम आयोजित करने जा रही है। 30 अप्रैल 2026 को दोपहर 3:30 बजे विधानसभा परिसर में एक गरिमामय संगोष्ठी होगी। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मिजोरम के राज्यपाल और पूर्व सैन्य प्रमुख जनरल वी. के. सिंह होंगे। वे इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित जनसमूह को संबोधित करेंगे। यह कार्यक्रम इतिहास के गौरवशाली पन्नों को एक बार फिर से जीवंत करने का एक सराहनीय प्रयास है।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
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