National News: सुप्रीम कोर्ट ने सिविल जज परीक्षा को लेकर एक बड़ा निर्देश दिया है। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट को एक अहम अपील पर विचार करने को कहा गया है। यह मामला अनुसूचित जाति (SC) के उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम 45% अंकों की शर्त से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट से इस नियम में ढील देने की गुजारिश पर गौर करने को कहा है। इस फैसले से कई उम्मीदवारों की उम्मीदें बढ़ गई हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट से क्या कहा?
न्यायपालिका में भर्ती का मामला हमेशा महत्वपूर्ण होता है। सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट प्रशासन को एक अहम सलाह दी है। शीर्ष अदालत ने कहा है कि सिविल जज (जूनियर डिवीजन) परीक्षा में SC वर्ग के लिए तय न्यूनतम अंकों की शर्त पर फिर से विचार किया जाए। वर्तमान में मुख्य परीक्षा पास करने के लिए इन उम्मीदवारों को कम से कम 45 फीसदी अंक लाने होते हैं। कई उम्मीदवारों ने इस सख्त शर्त को चुनौती दी थी। उनका कहना है कि यह नियम आरक्षित वर्ग के लिए बहुत कड़ा है।
क्या है 45 फीसदी अंकों का पूरा विवाद
पंजाब और हरियाणा में सिविल जज बनने की प्रक्रिया काफी कठिन है। मुख्य परीक्षा में सामान्य वर्ग के लिए न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक अनिवार्य हैं। वहीं, आरक्षित श्रेणी (SC) के उम्मीदवारों के लिए यह सीमा 45 प्रतिशत रखी गई है। याचिकाकर्ताओं ने अदालत में तर्क दिया है कि इस कट-ऑफ के कारण आरक्षित वर्ग की कई सीटें खाली रह जाती हैं। उन्होंने अदालत से मांग की है कि इस 45 फीसदी की सीमा को कम किया जाए। इससे अधिक आरक्षित उम्मीदवार साक्षात्कार (इंटरव्यू) तक पहुंच सकेंगे।
खाली पदों को भरने की गंभीर चुनौती
निचली अदालतों में जजों की कमी और लंबित मामले एक बड़ी समस्या हैं। याचिका में स्पष्ट कहा गया है कि सख्त कट-ऑफ के कारण SC कोटे के पद खाली पड़े रहते हैं। यदि इस कट-ऑफ में थोड़ी छूट दी जाती है, तो न्यायपालिका को योग्य उम्मीदवार मिल सकेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने इसी तर्क को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट को इस विषय पर विचार करने का निर्देश दिया है।
उम्मीदवारों की निगाहें अब हाईकोर्ट के फैसले पर
सुप्रीम कोर्ट के इस रुख से SC वर्ग के उम्मीदवारों को बड़ी राहत की आस है। अब मामला पूरी तरह से पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के पाले में है। हाईकोर्ट की प्रशासनिक समिति को इस छूट पर अंतिम निर्णय लेना है। यदि हाईकोर्ट इस कड़े नियम में ढील देता है, तो कई उम्मीदवारों का जज बनने का सपना सच हो सकता है। यह फैसला भविष्य की न्यायिक भर्तियों के लिए एक नजीर भी बन सकता है।
