Tamil Nadu News: तमिलनाडु की राजनीति में इस समय जबरदस्त उथल-पुथल मची हुई है। अभिनेता से नेता बने टीवीके (TVK) प्रमुख विजय को सरकार बनाने के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ रहा है। गुरुवार को विजय दूसरी बार राज्यपाल से मिले, लेकिन उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा। इस खबर के फैलते ही चेन्नई की सड़कों पर समर्थकों का सैलाब उमड़ पड़ा। हजारों कार्यकर्ताओं ने राजभवन घेरा और राज्यपाल पर पक्षपात करने के आरोप लगाए। पुलिस को अनियंत्रित भीड़ को काबू करने के लिए काफी बल प्रयोग करना पड़ा।
बहुमत के बावजूद फंसा पेंच
विजय की पार्टी 108 सीटें जीतकर राज्य की सबसे बड़ी शक्ति बनकर उभरी है। कांग्रेस के समर्थन के बाद उनके पास कुल 112 विधायकों का मजबूत समर्थन है। समर्थकों का आरोप है कि राज्यपाल जानबूझकर देरी कर रहे हैं ताकि प्रतिद्वंद्वी दलों को जोड़-तोड़ का अवसर मिल सके। तिरुपुर और आसपास के जिलों से आए कार्यकर्ताओं ने साफ कर दिया है कि वे शपथ ग्रहण तक पीछे नहीं हटेंगे। प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि लोकतांत्रिक परंपरा के अनुसार सबसे बड़े दल को तुरंत मौका मिलना चाहिए।
फ्लोर टेस्ट की मांग और संवैधानिक बहस
चेन्नई में चल रहे इस विरोध प्रदर्शन ने अब संवैधानिक मोड़ ले लिया है। कानूनी जानकारों और समर्थकों का तर्क है कि बहुमत का परीक्षण केवल विधानसभा के पटल पर होना चाहिए। उन्होंने ‘एस.आर. बोम्मई’ केस का हवाला देते हुए कहा कि राजभवन को फ्लोर टेस्ट की अनुमति देनी चाहिए। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि राजभवन के बंद कमरे में विधायकों की गिनती करना लोकतंत्र के खिलाफ है। समर्थकों का मानना है कि राज्यपाल को अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी निभाते हुए सबसे बड़े दल को आमंत्रित करना चाहिए।
राज्यपाल की शर्त और पलानीस्वामी की चुप्पी
सूत्रों के मुताबिक, राज्यपाल ने विजय को आश्वासन दिया है कि वह किसी दूसरी पार्टी को पहले नहीं बुलाएंगे। हालांकि, उन्होंने एक सख्त शर्त रखी है कि विजय को सभी विधायकों के व्यक्तिगत हस्ताक्षर वाला समर्थन पत्र जमा करना होगा। जब तक राजभवन को यह औपचारिक सूची नहीं मिलती, तब तक नियुक्ति प्रक्रिया शुरू नहीं होगी। इस बीच विपक्षी नेता पलानीस्वामी की खामोशी ने नए कयासों को जन्म दिया है। फिलहाल विजय के कार्यकर्ता अपने नेता को मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचाने के लिए चेन्नई में डटे हुए हैं।


