Ghaziabad News: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में वायु गुणवत्ता एक बार फिर चिंताजनक स्तर पर पहुंच गई है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, नौ दिनों के अंतराल के बाद मंगलवार को जिले का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 219 दर्ज किया गया। यह स्तर ‘खराब’ श्रेणी में आता है। विशेष बात यह है कि मंगलवार को गाजियाबाद का प्रदूषण स्तर देश के 249 प्रमुख शहरों में सबसे अधिक रिकॉर्ड किया गया है, जो स्थानीय पर्यावरण के लिए एक बड़ा अलर्ट है।
मई महीने में प्रदूषण का उतार-चढ़ाव
जिले की हवा इससे पहले 3 मई को ‘खराब’ श्रेणी (AQI 207) में रही थी। इसके बाद 4 मई से स्थिति में सुधार हुआ और हवा ‘मध्यम’ श्रेणी में आ गई थी। पिछले नौ दिनों के दौरान केवल एक दिन हवा ‘संतोषजनक’ श्रेणी में रही, जबकि बाकी दिन यह मध्यम बनी रही। अब अचानक आए इस उछाल ने प्रशासन और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। धूल भरी हवाएं और स्थानीय कारक इस अचानक आए बदलाव की मुख्य वजह माने जा रहे हैं।
लोनी के वेद विहार में प्रदूषण का स्तर 300 के पार
क्षेत्रीय आंकड़ों पर नजर डालें तो लोनी इलाके की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है। लोनी के वेद विहार केंद्र पर AQI 300 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी के करीब है। वहीं लोनी के ही दूसरे केंद्र पर यह 277 रहा। इसके विपरीत इंदिरापुरम, संजय नगर और वसुंधरा जैसे इलाकों में हवा अभी भी ‘मध्यम’ श्रेणी में बनी हुई है। तकनीकी खराबी के चलते गोविंदपुरम का प्रदूषण मापक यंत्र (सेंसर) मंगलवार को बंद रहा, जिससे वहां का सटीक आंकड़ा प्राप्त नहीं हो सका।
प्रशासनिक कार्रवाई और अधिकारियों का पक्ष
उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी अंकित सिंह ने स्थिति पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि विभाग की टीमें अधिक प्रदूषित इलाकों की लगातार निगरानी कर रही हैं। प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों और धूल उड़ाने वाली गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई की जा रही है। अधिकारियों का दावा है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ चालान और अन्य कानूनी प्रक्रियाएं जारी हैं ताकि एक्यूआई को जल्द से जल्द नियंत्रित किया जा सके।

