Bareilly News: उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में बहने वाली रामगंगा और नकटिया नदियों का जल प्रदूषण अब जानलेवा स्तर पर पहुंच गया है। रूहेलखंड विश्वविद्यालय (MJPRU) के फार्मेसी विभाग द्वारा किए गए हालिया शोध में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इन नदियों के जल में आर्सेनिक और सीसा (Lead) जैसे खतरनाक तत्वों की मात्रा विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के निर्धारित मानकों से कई गुना अधिक पाई गई है, जो सीधे तौर पर जनस्वास्थ्य के लिए एक गंभीर चेतावनी है।
WHO मानकों से कई गुना अधिक प्रदूषण का खुलासा
विश्वविद्यालय के बीफार्मा अंतिम वर्ष के छात्रों विनय मिश्रा, राजा रस्तोगी और रीतू चौधरी द्वारा किए गए इस शोध में ICP-MS (आइसीपी-एमएस) तकनीक का उपयोग किया गया। जांच में सामने आया कि नकटिया नदी में सीसा मानक से छह गुना और रामगंगा में चार गुना अधिक है। इसी तरह, दोनों नदियों में आर्सेनिक की मात्रा मानक से दो गुना अधिक दर्ज की गई है। यह स्थिति न केवल जलीय जीवन बल्कि इन नदियों पर निर्भर मानव आबादी के लिए भी अत्यंत भयावह है।
भारी धातुओं का स्वास्थ्य पर खतरनाक प्रभाव
विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि पानी में मौजूद ये भारी धातुएं सूक्ष्म मात्रा में भी शरीर को गंभीर नुकसान पहुंचाती हैं। सीसा (Lead) बच्चों के मानसिक विकास और स्मरण शक्ति को स्थायी रूप से बाधित कर सकता है। वहीं, आर्सेनिक का लंबे समय तक सेवन शरीर में कैंसर जैसी घातक बीमारियों का कारक बनता है। शोध के अनुसार, बढ़ता औद्योगिकीकरण, कृषि रसायनों का अनियंत्रित उपयोग और सीवेज रिसाव इस प्रदूषण के मुख्य कारण हैं।
नदियों में प्रदूषण का स्तर (mg/L में)
रसायन WHO मानक रामगंगा में स्तर नकटिया में स्तर सीसा (Lead) 0.01 0.042 (4 गुना) 0.059 (6 गुना) आर्सेनिक 0.01 0.022 (2 गुना) 0.020 (2 गुना)
टीडीएस (TDS) को लेकर फैली गलतफहमी पर विशेषज्ञों की राय
शोध के मार्गदर्शक डॉ. अमित कुमार वर्मा ने स्पष्ट किया कि केवल कम टीडीएस होने से पानी सुरक्षित नहीं माना जा सकता। आम जनता अक्सर यह मानती है कि यदि पानी का टीडीएस स्तर कम है, तो वह पीने योग्य है। वैज्ञानिक वास्तविकता यह है कि अत्यंत विषैली भारी धातुएं इतनी सूक्ष्म होती हैं कि उन्हें सामान्य टीडीएस मीटर से नहीं मापा जा सकता। इसके लिए उन्नत प्रयोगशाला परीक्षणों की आवश्यकता होती है, जिसके प्रति जागरूकता फैलाना अनिवार्य है।

