भागलपुर: पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ की राष्ट्रवाद संगोष्ठी में उमड़ा जनसैलाब, सनातन और इतिहास पर रखे प्रखर विचार

Bhagalpur News: प्रखर वक्ता और विचारक पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ तीन दिवसीय प्रवास पर भागलपुर पहुंचे, जहां भारत विकास परिषद की सत्यम शाखा द्वारा उनके कार्यक्रमों का भव्य आयोजन किया गया। टाउन हॉल में आयोजित ‘राष्ट्रवाद संगोष्ठी’ में उनकी लोकप्रियता का आलम यह था कि एक हजार की क्षमता वाले हॉल में करीब दो हजार लोग उमड़ पड़े। 9 से 11 मई तक चले इस प्रवास के दौरान उन्होंने समाज को राष्ट्रवादी विचारधारा और सांस्कृतिक चेतना से जोड़ने का आह्वान किया।

भाषण की शुरुआत में बंगाल और नेताजी का जिक्र

पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ ने 10 मई को अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए कहा कि उन्हें भागलपुर की धरती पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जन्मभूमि पश्चिम बंगाल जैसा अनुभव हो रहा है। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा, “कहीं ऐसा न हो कि मैं जोश में भागलपुर की जगह बंगाल बोल दूं।” उनके इस बयान को राजनीतिक हलकों में बंगाल की बदलती राजनीति और राष्ट्रवाद के बढ़ते प्रभाव के संकेत के रूप में देखा गया, जिससे श्रोताओं में जबरदस्त उत्साह भर गया।

इतिहास की सच्चाइयों और सनातन की रक्षा पर जोर

कुलश्रेष्ठ ने दावा किया कि वे पिछले 15 वर्षों में देश भर में 800 से अधिक सभाएं कर चुके हैं और कभी सच से समझौता नहीं किया। उन्होंने कहा, “मैं उस समाज से आता हूं जहां कलम की पूजा होती है; अगर सच बोलने के लिए मंच छोड़ना पड़े, तो मैं पीछे नहीं हटूंगा।” उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे गलत पढ़ाए गए इतिहास को त्यागकर अपनी जड़ों को पहचानें और सनातन संस्कृति की रक्षा के लिए मतदान करते समय 30 सेकंड गंभीरता से सोचें।

भारतीय संस्कृति बनाम पश्चिमी परंपराएं

मातृत्व और संस्कृति पर विचार रखते हुए उन्होंने ‘मदर्स डे’ जैसी पश्चिमी परंपराओं पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म में मां की पूजा हर पल होती है, न कि केवल एक दिन। राजमाता जीजाबाई का उदाहरण देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि एक भारतीय मां राष्ट्र निर्माण की पहली पाठशाला होती है। साथ ही, उन्होंने 14 नवंबर की जगह 26 दिसंबर को ‘बाल दिवस’ मनाने का सुझाव दिया, जो गुरु गोबिंद सिंह जी के साहिबजादों की शहादत का दिन है।

संविधान और राष्ट्रीय प्रतीकों पर बेबाक टिप्पणी

संबोधन के दौरान उन्होंने भारतीय संविधान के प्रारंभिक स्वरूप का जिक्र करते हुए कहा कि मूल प्रति में हिंदू देवी-देवताओं के चित्र थे, जिन्हें बाद में हटा दिया गया। उन्होंने ‘सेकुलर’ शब्द के अर्थ और उसके उपयोग पर भी अपनी राय रखी। अंत में, उन्होंने एकजुट हिंदू समाज की वकालत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह और योगी आदित्यनाथ जैसे नेतृत्व की नीतियों की सराहना की, जिन्होंने वैश्विक स्तर पर भारत का मान बढ़ाया है।

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