Delhi News: राजधानी दिल्ली की सीमाओं पर वाहनों के प्रवेश के समय वसूला जाने वाला पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क (ECC) एक बार फिर विवादों में है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बक्करवाला टोल प्लाजा को बैरियर मुक्त करने के दौरान ईसीसी की उपयोगिता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। गडकरी ने कहा कि इस वसूली से न केवल भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की छवि खराब हो रही है, बल्कि यह भी स्पष्ट नहीं है कि इस फंड से वायु प्रदूषण कम करने में कितनी सफलता मिली है।
करोड़ों खर्च के बावजूद ‘ढाक के तीन पात’ जैसे हालात
दिल्ली के 13 प्रमुख टोल नाकों को जाम मुक्त करने के लिए सरकार अब तक करीब 100 करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है। वर्ष 2017-18 में 80 करोड़ रुपये की लागत से रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन डिवाइस (RFID) सिस्टम लगाया गया था, ताकि वाहनों की आवाजाही सुगम हो सके। हालांकि, धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। फ्री लेन में भी टोल कंपनियों के कर्मचारी वाहनों को रोककर वसूली करते हैं, जिससे एक्सप्रेस-वे और राजमार्गों पर सरकार द्वारा खर्च किए गए हजारों करोड़ रुपये का निवेश व्यर्थ साबित हो रहा है।
गाजीपुर और एनएच-9 पर जाम से जनता बेहाल
ईसीसी वसूली के कारण दिल्ली की सीमाओं पर 15 मिनट से लेकर एक घंटे तक का लंबा जाम लग रहा है। पूर्वी दिल्ली के एनएच-9 का उदाहरण देते हुए विशेषज्ञों ने बताया कि 11 हजार करोड़ की परियोजना के बावजूद गाजीपुर टोल पर पहुंचते ही वाहनों की गति रुक जाती है। यही स्थिति चिल्ला बॉर्डर और कालिंदी कुंज बॉर्डर पर भी देखी जा रही है। दिल्ली में प्रवेश के कुल 156 पॉइंट हैं, जिनमें से 13 प्रमुख रास्तों से ही 85 प्रतिशत यातायात गुजरता है, जहाँ ईसीसी वसूली सिरदर्द बनी हुई है।
57 प्रतिशत फंड का उपयोग ही नहीं कर पाई सरकार
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 2015 से शुरू हुई ईसीसी वसूली का मुख्य उद्देश्य प्रदूषण कम करना था। आंकड़ों के अनुसार, अब तक लगभग 158 करोड़ रुपये वसूले गए हैं, लेकिन दिल्ली सरकार इसका मात्र 43 प्रतिशत (68 करोड़ रुपये) ही खर्च कर पाई है। यानी 57 प्रतिशत राशि अभी भी विशेष खाते में बिना उपयोग के पड़ी है। हाल ही में अप्रैल 2026 में दो, तीन और चार धुरी वाले वाहनों पर ईसीसी की दरें और बढ़ा दी गई हैं, जिससे परिवहन लागत और जाम की समस्या और विकट होने की आशंका है।

