Delhi News: दिल्ली में तैनात 30 वर्षीय जज अमन शर्मा की आत्महत्या ने सबको झकझोर दिया है। मूल रूप से अलवर निवासी अमन एक होनहार न्यायाधीश थे। उनकी अचानक मौत से न्यायपालिका में गहरा शोक व्याप्त है। इस दर्दनाक घटना ने अधिवक्ता प्रेम प्रकाश शर्मा के परिवार को तोड़ दिया है। उनका छोटा भाई पहले ही सड़क हादसे के कारण मानसिक अवसाद से जूझ रहा है। अब इस घटना ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है।
पिता को किया आखिरी फोन कॉल
आत्महत्या से दो दिन पहले अमन ने पिता को फोन किया था। उन्होंने रुंधे गले से कहा था कि यह उनका आखिरी कॉल है। अब उनसे और नहीं जिया जा रहा है। बेटे की आवाज में दर्द सुनकर प्रेम प्रकाश शर्मा तुरंत दिल्ली रवाना हो गए। पिता को उम्मीद थी कि वे वहां पहुंचकर हालात को अच्छी तरह संभाल लेंगे। वे अपने बेटे को मानसिक तनाव से सुरक्षित बाहर निकाल लाएंगे।
पत्नी द्वारा पिता का अपमान बना कारण
पिता के दिल्ली पहुंचने पर वहां का माहौल तनावपूर्ण था। आरोप है कि अमन के सामने ही पत्नी ने पिता का भारी अपमान किया। एक होनहार बेटे के लिए पिता का तिरस्कार देखना बिल्कुल असहनीय था। इसी अपमान ने अमन को भीतर से पूरी तरह तोड़ दिया था। दो मई की दोपहर कमरे से अचानक तेज बहस की आवाजें आईं। इसके बाद अमन ने फंदा लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली।
प्रेम विवाह और न्यायिक सेवा का सफर
अमन बेहद शांत और मेधावी स्वभाव वाले युवक थे। अपनी मेहनत के दम पर उन्होंने साल 2021 में न्यायिक सेवा परीक्षा पास की थी। पिता उनकी शादी अपने मित्र की बेटी से करवाना चाहते थे। बेटे की खुशी को देखते हुए पिता ने अपनी इच्छा छोड़ दी। इसके बाद रीति-रिवाज के साथ अमन और उनकी प्रेमिका का विवाह संपन्न हुआ। दोनों के परिवारों ने इस रिश्ते को अपनी मंजूरी दे दी थी।
वैवाहिक जीवन में विवाद और अनकहा दर्द
शादी के कुछ समय बाद पति-पत्नी के बीच गहरे मतभेद शुरू हो गए। दोनों के बीच अक्सर विवाद होने लगा था। परिजनों का आरोप है कि इन झगड़ों को बढ़ाने में साली की भूमिका थी। उनकी साली जम्मू में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी के पद पर तैनात हैं। अमन अक्सर अलवर आते थे लेकिन उन्होंने कभी अपना दुख जाहिर नहीं किया। वह अपनी पीड़ा को मुस्कुराहट के पीछे आसानी से छिपा लिया करते थे।
राजकीय सम्मान से अंतिम विदाई और जांच
रविवार सुबह अमन का पार्थिव शरीर अलवर पहुंचा तो माहौल बहुत ज्यादा गमगीन हो गया। राजकीय सम्मान और जनसमूह के बीच श्मशान घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। पिता ने भारी मन से अपने लाडले बेटे को मुखाग्नि दी। अंतिम संस्कार में ससुराल पक्ष का कोई भी सदस्य शामिल नहीं हुआ था। अब अमन के दुखी परिजन इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।


