नादौन यौन शोषण मामला: 4 मई को कोर्ट में दर्ज होंगे पीड़िताओं के बयान, माता-पिता पर भी लटकी कानूनी तलवार

Himachal News: नादौन उपमंडल में यौन शोषण और बाल विवाह की शिकार दो नाबालिग बच्चियों के बयान 4 मई को अदालत में दर्ज होंगे। न्यायिक प्रक्रिया के तहत इस दौरान बच्चियों के माता-पिता के बयान भी कलमबद्ध किए जाएंगे। वर्तमान में दोनों बच्चियों को सुरक्षा के मद्देनजर वन स्टॉप सेंटर में रखा गया है। सोमवार को पुलिस उन्हें कोर्ट और फिर डिस्ट्रिक्ट चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के समक्ष पेश करेगी। इसके बाद ही उनकी कस्टडी पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।

एक पीड़िता के बालिग होने की संभावना

मामले में सूत्रों के हवाले से एक नया मोड़ सामने आया है। जानकारी के अनुसार, पीड़िताओं में से एक युवती बालिग हो सकती है। हालांकि, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग इस दावे की पुष्टि गहन छानबीन के बाद ही करेंगे। युवती का मेडिकल परीक्षण और शैक्षणिक दस्तावेजों की जांच की जा रही है। इन रिपोर्टों के आधार पर ही उम्र से संबंधित कानूनी खुलासा हो सकेगा। फिलहाल पुलिस दोनों मामलों को पूरी गंभीरता से संभाल रही है।

अस्पताल में हुआ था सनसनीखेज खुलासा

यौन शोषण का यह मामला तब उजागर हुआ जब दोनों बच्चियां अस्पताल में स्वास्थ्य जांच के लिए पहुंची थीं। ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर ने शारीरिक लक्षणों के आधार पर संदेह होने पर तुरंत नादौन पुलिस को सूचित किया। इसके बाद हरकत में आई पुलिस ने बाल विवाह और पोक्सो एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया। मामले की एक बच्ची बिहार से है, जबकि दूसरी स्थानीय क्षेत्र की रहने वाली बताई जा रही है।

माता-पिता पर दर्ज हो सकता है मुकदमा

अदालत में सोमवार को होने वाली सुनवाई काफी निर्णायक साबित हो सकती है। यदि बयानों में यह पुष्टि होती है कि माता-पिता ने नाबालिग उम्र में ही उनका विवाह करवाया था, तो उन पर भी गाज गिरना तय है। पुलिस और डीसीडब्ल्यूसी नियमों के अनुसार उनके खिलाफ बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के तहत कार्रवाई कर सकते हैं। एएसपी राजेश उपाध्याय ने बताया कि 4 मई को कोर्ट में बयानों के बाद जांच को आगे बढ़ाया जाएगा।

प्रशासन और डीसीडब्ल्यूसी की सख्त कार्रवाई

डिस्ट्रिक्ट चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (डीसीडब्ल्यूसी) का बेंच ऑफ मजिस्ट्रेट इस संवेदनशील मामले की सीधी निगरानी कर रहा है। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य बच्चियों को सुरक्षित माहौल प्रदान करना और दोषियों को सजा दिलाना है। पुलिस की जांच टीम दस्तावेजों के मिलान और फॉरेंसिक साक्ष्यों को जुटाने में व्यस्त है। इस मामले ने क्षेत्र में बाल विवाह जैसी कुरीतियों के खिलाफ प्रशासन की सतर्कता को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।

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