Himachal News: ऑनलाइन होटल बुकिंग के बढ़ते चलन के बीच अब साइबर ठगों ने लोगों को लूटने का नया तरीका निकाला है। हाल ही में फेक होटल बुकिंग वेबसाइट्स के जरिए पर्यटकों को ठगने के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं। ये फर्जी वेबसाइट्स देखने में बिल्कुल असली प्लेटफॉर्म जैसी लगती हैं। हिमाचल प्रदेश जैसे प्रमुख पर्यटन राज्य में भी ऐसे कई फ्रॉड दर्ज हुए हैं। राज्य पुलिस ने अब आम जनता को ऑनलाइन बुकिंग करते समय विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए हैं।
आकर्षक ऑफर्स और भारी डिस्काउंट का लालच
शातिर ठग सक्रिय होकर फर्जी लिंक और नकली वेबसाइट्स के जरिए लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। पर्यटकों को सस्ते होटल और 70 प्रतिशत तक भारी डिस्काउंट का लालच दिया जाता है। ठग अक्सर ‘लिमिटेड टाइम डील’ या ‘सिर्फ कुछ कमरे बचे हैं’ जैसे संदेश भेजते हैं। ऐसे लुभावने ऑफर्स को देखकर लोग जल्दबाजी में बिना जांच किए बुकिंग कर देते हैं। इससे न केवल उनका पैसा डूब जाता है, बल्कि उनकी पूरी यात्रा योजना भी खराब हो जाती है।
गूगल विज्ञापनों का सहारा ले रहे साइबर ठग
ये फर्जी लिंक कई बार गूगल के स्पॉन्सर्ड विज्ञापनों में भी दिखाई देते हैं। विज्ञापन के रूप में दिखने के कारण यूजर इन पर आसानी से भरोसा कर लेते हैं। साइबर अपराधी तकनीकी रूप से इतने माहिर हैं कि वे असली वेबसाइट्स की हूबहू नकल तैयार कर लेते हैं। यूजर जैसे ही भुगतान करता है, वह राशि ठगों के खाते में चली जाती है। पुलिस ने चेतावनी दी है कि किसी भी अनजान लिंक या अत्यधिक सस्ते ऑफर्स पर तुरंत विश्वास न करें।
सुरक्षित बुकिंग के लिए अपनाएं ये जरूरी तरीके
पुलिस विभाग ने पर्यटकों को सुरक्षित ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। केवल विश्वसनीय और जाने-माने बुकिंग प्लेटफॉर्म का ही उपयोग करना सबसे सुरक्षित है। होटल की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर या उनके आधिकारिक नंबर पर सीधे संपर्क करके बुकिंग की पुष्टि जरूर करें। किसी भी सोशल मीडिया लिंक के माध्यम से भुगतान करने से बचें। बुकिंग करने से पहले वेबसाइट के यूआरएल (URL) और स्पेलिंग को ध्यान से जरूर चेक करें।
धोखाधड़ी होने पर यहां करें तुरंत शिकायत
यदि कोई व्यक्ति इस प्रकार के साइबर फ्रॉड का शिकार होता है, तो उसे समय रहते कदम उठाने चाहिए। पीड़ित व्यक्ति को तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करना चाहिए। इसके अलावा, नागरिक अपनी शिकायत आधिकारिक साइबर क्राइम पोर्टल पर भी ऑनलाइन दर्ज करा सकते हैं। जितनी जल्दी रिपोर्ट दर्ज होगी, पैसे वापस मिलने की संभावना उतनी ही अधिक रहती है। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे जागरूक रहें और दूसरों को भी इसके प्रति सचेत करें।


