Uttarakhand News: होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी सेना लगातार व्यापारिक जहाजों को निशाना बना रही है। इस खतरनाक इलाके में पिछले 45 दिनों से एक भारतीय जहाज फंसा हुआ है। इस बीच जहाज के कैप्टन आशीष शर्मा ने बहादुरी की अनोखी मिसाल पेश की है। उत्तराखंड के रुड़की निवासी आशीष ने अपनी जान की परवाह बिल्कुल नहीं की। उन्होंने 12 भारतीय क्रू सदस्यों को सुरक्षित स्वदेश भेज दिया है। कैप्टन आशीष खुद अभी भी उसी जहाज पर डटे हुए हैं।
खतरनाक होर्मुज में फंसा भारतीय जहाज
होर्मुज जलडमरूमध्य का इलाका इन दिनों बेहद तनावपूर्ण है। ईरान ने इस अहम जल मार्ग को पूरी तरह बंद कर दिया है। हाल ही में ईरानी नौसेना ने दो भारतीय जहाजों पर गोलीबारी भी की थी। इस इलाके में भारत समेत कई देशों के जहाज फंसे हुए हैं। इन्हीं जहाजों में से एक की जिम्मेदारी कैप्टन आशीष शर्मा निभा रहे हैं। कठिन समय में ही नेतृत्व की असली परीक्षा होती है। कैप्टन आशीष ने अद्भुत साहस का परिचय दिया है।
कैप्टन ने घर वापसी का मौका ठुकराया
ईरान ने वाणिज्यिक जहाजों को निकलने का एक सुरक्षित रास्ता दिया था। घर वापसी का रास्ता साफ होने पर कैप्टन आशीष आसानी से वापस लौट सकते थे। लेकिन उन्होंने अपने कर्तव्य और साथियों की सुरक्षा को ही प्राथमिकता दी। जहाज पर कुल 24 भारतीय क्रू सदस्य मौजूद थे। कैप्टन आशीष ने अपने विशेषाधिकार का बिलकुल इस्तेमाल नहीं किया। उन्होंने 12 क्रू सदस्यों को सुरक्षित भारत रवाना कर दिया। इसके उलट उन्होंने खुद जहाज पर ही रुकने का साहसिक फैसला लिया।
आखिरी साथी के लौटने तक नहीं छोड़ेंगे जहाज
कैप्टन आशीष शर्मा ने अपने इस साहसिक फैसले पर स्पष्ट बात की है। उन्होंने कहा कि जहाज के हर सदस्य की सुरक्षा कैप्टन की पहली जिम्मेदारी होती है। जब तक जहाज का आखिरी साथी सुरक्षित घर नहीं पहुंच जाता, वह अपनी पोस्ट नहीं छोड़ेंगे। बाकी बचे 12 सदस्यों को सुरक्षित निकालने के लिए नौवहन कंपनी लगातार प्रयास कर रही है। जहाज को इस खतरनाक इलाके से बाहर निकलने में करीब डेढ़ महीने का वक्त लग सकता है।
‘देश गरिमा’ ने सफलतापूर्वक पार किया रास्ता
कैप्टन आशीष ने एक वीडियो संदेश के जरिए सभी के सुरक्षित होने की जानकारी दी है। भारत लौटने वाले 12 सदस्यों ने अपने कैप्टन के साहसिक बलिदान के प्रति आभार जताया है। इस भारी तनावपूर्ण माहौल के बीच एक राहत भरी खबर भी सामने आई है। भारतीय ध्वज वाले तेल टैंकर ‘देश गरिमा’ ने इस खतरनाक जलमार्ग को सफलतापूर्वक पार कर लिया। हालांकि, सुरक्षा और संभावित खतरे को देखते हुए कम से कम चार अन्य जहाज वहां से वापस लौट गए।
