West Bengal News: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची (Voter List) को लेकर मचे घमासान के बीच सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने साफ किया कि अगर किसी व्यक्ति का नाम वोटर लिस्ट से बाहर हो जाता है, तो उसका वोट देने का अधिकार हमेशा के लिए खत्म नहीं होगा। सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति इस चुनाव में वोट नहीं दे पाता है और बाद में ट्रिब्यूनल उसे पात्र मानता है, तो उसे दोबारा सूची में शामिल किया जाएगा। यह नियम उन लोगों पर भी लागू होगा जिन्हें पहले शामिल कर बाद में बाहर कर दिया गया था। मामले की अगली अहम सुनवाई अब 6 अप्रैल को होगी।
7 अप्रैल तक सुलझ जाएंगी लाखों आपत्तियां
कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ने सुप्रीम कोर्ट को इस मामले की प्रगति रिपोर्ट सौंपी है। रिपोर्ट के अनुसार, SIR के तहत प्राप्त कुल 60 लाख आपत्तियों में से लगभग 47 लाख का निपटारा 31 मार्च तक पूरा हो चुका है। प्रशासन हर दिन करीब 1.75 लाख से 2 लाख आपत्तियों की जांच कर रहा है। अदालत को भरोसा दिलाया गया है कि 7 अप्रैल तक सभी लंबित शिकायतों को दूर कर लिया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने इन आंकड़ों और काम की रफ्तार पर संतोष जताया है।
सॉफ्टवेयर बताएगा क्यों कटा आपका नाम
जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने सुनवाई के दौरान मतदाता डेटा रखने वाले सॉफ्टवेयर की तकनीक पर अहम बात कही। उन्होंने बताया कि सॉफ्टवेयर का ढांचा ऐसा है जो यह स्पष्ट करता है कि किसी व्यक्ति को लिस्ट में क्यों रखा गया या क्यों बाहर निकाला गया। कोर्ट ने निर्देश दिया कि जब भी कोई व्यक्ति इसके खिलाफ अपील करे, तो उसे बाहर किए जाने का ठोस कारण बताया जाना चाहिए। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए यह कदम बेहद जरूरी माना जा रहा है।
चुनाव की सूची और संवैधानिक अधिकार पर नजर
सुप्रीम कोर्ट की विशेष पीठ दो प्रमुख पहलुओं पर बारीकी से गौर कर रही है। पहला यह कि चुनाव किस सूची के आधार पर संपन्न कराए जाएंगे और दूसरा मतदाताओं का जरूरी संवैधानिक अधिकार। जस्टिस बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने स्पष्ट किया कि किसी भी नागरिक को उसके लोकतांत्रिक हक से बिना ठोस वजह के वंचित नहीं किया जा सकता। कोर्ट यह सुनिश्चित करना चाहता है कि पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष और तार्किक हो।
