सावधान! बच्चों की इन 2 जानलेवा बीमारियों की वैक्सीन के सैंपल फेल, कसौली CDL ने जारी किया देशभर में अलर्ट

Himachal News: हिमाचल प्रदेश के कसौली स्थित केंद्रीय औषधि प्रयोगशाला (CDL) ने छोटे बच्चों के टीकाकरण से जुड़ी दो अहम वैक्सीन को लेकर गंभीर अलर्ट जारी किया है। प्रयोगशाला की जांच में न्यूमोकोकल और पैंटावैलेंट वैक्सीन के फील्ड सैंपल मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं। इन सैंपलों को आधिकारिक तौर पर ‘नॉट ऑफ स्टैंडर्ड क्वालिटी’ घोषित कर दिया गया है। सरकारी विभाग ने यह कार्रवाई फील्ड से उठाए गए सैंपलों की गुणवत्ता संदिग्ध पाए जाने के बाद की है।

इन घातक बीमारियों से बचाव के लिए लगती हैं ये वैक्सीन

बच्चों को निमोनिया जैसी जानलेवा बीमारी से सुरक्षित रखने के लिए न्यूमोकोकल वैक्सीन का इस्तेमाल होता है। वहीं, पैंटावैलेंट वैक्सीन बच्चों को पांच गंभीर रोगों से सुरक्षा प्रदान करती है। इनमें काली खांसी, हेपेटाइटिस-बी, दिमागी बुखार, टिटनेस और डिप्थीरिया शामिल हैं। जांच रिपोर्ट के अनुसार, इन टीकों में ‘फिजिकल आस्पेक्ट्स’ यानी भौतिक मानकों की भारी कमी पाई गई है। इस खामी के कारण इन वैक्सीन की प्रभावशीलता पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।

सीडीएल कसौली ने वेबसाइट पर जारी की विस्तृत जानकारी

केंद्रीय औषधि प्रयोगशाला कसौली ने जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करते हुए इसे अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड कर दिया है। यह संस्थान देशभर में निर्मित और विदेशों से आयात होने वाली सभी वैक्सीन के परीक्षण के लिए जिम्मेदार है। सामान्य प्रक्रिया के तहत मानकों पर सही पाए जाने के बाद ही टीकों को बाजार में उतारा जाता है। लेकिन इस बार सीधे फील्ड से उठाए गए सैंपल फेल होने से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है।

दोषी कंपनियों पर सरकार जल्द कर सकती है कड़ी कार्रवाई

नियमों के मुताबिक, किसी भी वैक्सीन का बैच फेल होने पर संबंधित निर्माता कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाती है। केंद्र और राज्य सरकारें अब इन सैंपलों के फेल होने के कारणों की गहराई से जांच कर रही हैं। सीडीएल कसौली की इस रिपोर्ट ने बच्चों के स्वास्थ्य सुरक्षा चक्र में बड़ी सेंध की ओर इशारा किया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि गुणवत्ता से समझौता बच्चों के जीवन को खतरे में डाल सकता है।

फील्ड सैंपलिंग के दौरान खुली गुणवत्ता के दावों की पोल

आमतौर पर कंपनियां बाजार में माल भेजने से पहले स्वयं भी जांच का दावा करती हैं। लेकिन इस साल सीडीएल में जांच के लिए आए इन दो फील्ड सैंपलों ने दावों की पोल खोल दी है। विभाग अब इन टीकों के पूरे स्टॉक की पहचान करने में जुट गया है ताकि उन्हें इस्तेमाल से रोका जा सके। अभिभावकों और स्वास्थ्य केंद्रों को सलाह दी गई है कि वे अलर्ट में दिए गए बैच नंबरों की जांच अवश्य कर लें।

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