Kerala News: केरल में नई सरकार के गठन को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री पद की दौड़ में केसी वेणुगोपाल का नाम सबसे आगे चल रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी दिल्ली में लगातार बैठकें कर रहे हैं। सरकार बनाने की आखिरी तारीख 23 मई बहुत करीब आ गई है। ऐसे में पार्टी नेतृत्व जल्द ही अंतिम नाम पर मुहर लगा सकता है। फिलहाल सस्पेंस बना हुआ है कि बाजी किसके हाथ लगेगी।
मुख्यमंत्री की रेस में केसी वेणुगोपाल सबसे प्रबल दावेदार
केरल की कमान संभालने के लिए वैसे तो कई दिग्गज कतार में खड़े हैं। इनमें रमेश चेन्निथला, वीडी सतीशन और केसी वेणुगोपाल के नाम प्रमुखता से लिए जा रहे हैं। हालांकि, राजनीतिक गलियारों में वेणुगोपाल को सबसे मजबूत उम्मीदवार माना जा रहा है। वेणुगोपाल की संगठन पर गहरी पकड़ है। दूसरी तरफ, स्थानीय विधायकों का एक बड़ा वर्ग वीडी सतीशन के समर्थन में लामबंद दिख रहा है। इससे आलाकमान के लिए फैसला लेना चुनौतीपूर्ण हो गया है।
गांधी परिवार के बेहद करीबी और भरोसेमंद हैं वेणुगोपाल
केसी वेणुगोपाल कांग्रेस के उन गिने-चुने नेताओं में शामिल हैं, जिन पर गांधी परिवार आंख मूंदकर भरोसा करता है। वह साल 2019 से अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी में संगठन महासचिव का अहम पद संभाल रहे हैं। टिकट बंटवारे से लेकर गठबंधन प्रबंधन तक में उनकी भूमिका निर्णायक होती है। पार्टी के भीतर वेणुगोपाल को संकटमोचक के तौर पर देखा जाता है। उनकी इसी निष्ठा और अनुभव ने उन्हें मुख्यमंत्री पद की दौड़ में सबसे आगे खड़ा कर दिया है।
जमीनी राजनीति के माहिर खिलाड़ी माने जाते हैं वेणुगोपाल
केसी वेणुगोपाल का पूरा नाम कोझुम्मल चट्टाडी वेणुगोपाल है। उनकी केरल की स्थानीय राजनीति में पैठ बहुत पुरानी और मजबूत है। वह 1996 से 2009 तक अलप्पुझा विधानसभा क्षेत्र से लगातार तीन बार विधायक चुने गए। इसके अलावा वह ओमान चांडी की सरकार में पर्यटन मंत्री के रूप में अपनी प्रशासनिक क्षमता साबित कर चुके हैं। उनके पास राज्य के साथ-साथ केंद्र की राजनीति का भी व्यापक अनुभव है, जो उनके पक्ष में जाता है।
मनमोहन सिंह सरकार में भी निभा चुके हैं बड़ी जिम्मेदारी
वेणुगोपाल ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान तब बनाई जब वह 2009 और 2014 के लोकसभा चुनाव में विजयी रहे। उन्होंने डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार में ऊर्जा और नागरिक उड्डयन जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों में राज्य मंत्री के रूप में कार्य किया। उनके इसी प्रशासनिक रिकॉर्ड और हाईकमान से निकटता के कारण केरल की राजनीति में उनका कद काफी बड़ा हो गया है। अब देखना यह है कि कांग्रेस अध्यक्ष खरगे उनके नाम पर अंतिम मुहर कब लगाते हैं।

