Maharashtra News: ‘कमांडो’, ‘बागी 3’ और ‘पाताल लोक’ जैसी दमदार प्रस्तुतियों से अपनी पहचान बनाने वाले अभिनेता जयदीप अहलावत ने खलनायकों की भूमिकाओं को लेकर एक नया नजरिया पेश किया है। मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने बताया कि पर्दे पर ‘बुरे आदमी’ का किरदार निभाते समय भी वे उसके भीतर छिपी इंसानियत को खोजने की कोशिश करते हैं। जयदीप का मानना है कि जब तक किसी नकारात्मक पात्र में मानवीय पहलू नहीं दिखाया जाता, तब तक दर्शक उससे जुड़ाव महसूस नहीं कर पाते।
बिना मानवीय पक्ष के दर्शक नहीं जुड़ पाते पात्र से
जयदीप अहलावत ने अपनी अभिनय प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि सिनेमा हो या साहित्य, बिना मानवीय संवेदनाओं के कोई भी पात्र अधूरा है। उन्होंने तर्क दिया कि यदि किसी विलेन को केवल ‘बुरा’ दिखाया जाए, तो वह दर्शकों की कल्पना से बाहर हो जाता है। जयदीप के अनुसार, “जब मैं नकारात्मक भूमिकाएं निभाता हूं, तो मेरी कोशिश होती है कि उसमें ऐसी चीजें डाली जाएं जिनसे लोग खुद को या अपने आसपास के किसी व्यक्ति को जोड़ सकें।”
विश्व प्रसिद्ध विलेन ‘इयागो’ का दिया उदाहरण
अपनी बात को पुख्ता करने के लिए जयदीप ने शेक्सपियर के महान नाटक ‘ओथेलो’ के पात्र ‘इयागो’ का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि दुनिया भर के साहित्य में इयागो को सबसे बड़ा खलनायक माना जाता है, लेकिन उसके कृत्यों के पीछे भी कुछ मानवीय कारण और पहलू मौजूद थे। जयदीप मानते हैं कि इतिहास या असल दुनिया में कुछ भी पूरी तरह काला या सफेद (अच्छा या बुरा) नहीं होता, बल्कि सब कुछ धूसर (ग्रे) शेड्स में होता है।
महाभारत और रामायण के उदाहरण से समझाई मानवीय प्रवृत्ति
अंडरवर्ल्ड और अपराधियों के महिमामंडन के सवाल पर जयदीप ने बहुत ही दिलचस्प तर्क दिया। उन्होंने बचपन की यादें साझा करते हुए कहा कि जब टीवी पर ‘महाभारत’ आता था, तो लोग गीता उपदेश वाले एपिसोड के बजाय युद्ध वाले एपिसोड देखना ज्यादा पसंद करते थे। उन्होंने कहा, “लोगों के अंदर एक स्वाभाविक प्रवृत्ति होती है कि वे बुराई को बढ़ते हुए देखना चाहते हैं, ताकि अंत में जब उस बुराई का विनाश हो, तो उन्हें अधिक मानसिक संतोष मिल सके।”
विलेन का महिमामंडन नहीं, बल्कि सही अंत जरूरी
जयदीप का मानना है कि किसी अपराधी की कहानी दिखाना उसका महिमामंडन करना नहीं है, बशर्ते कहानी का अंत उसके कर्मों के हिसाब से न्यायपूर्ण हो। उन्होंने कहा कि लेखक को खलनायक को जितना संभव हो उतना क्रूर बनाना चाहिए, लेकिन उसका अंत भी उतना ही कड़ा होना चाहिए। जब दर्शक बुराई का अंत देखते हैं, तभी कहानी का उद्देश्य पूरा होता है और समाज को सही संदेश जाता है।
बदल रहा है सिनेमा: अब हीरो और विलेन के बीच की रेखा हुई धुंधली
पहले के दौर में प्राण, अमरीश पुरी और प्रेम चोपड़ा जैसे कलाकार केवल खलनायक की भूमिकाओं के लिए जाने जाते थे। जयदीप इस बदलाव को सकारात्मक मानते हैं कि अब मुख्य अभिनेता भी नकारात्मक किरदार निभा रहे हैं। उन्होंने कहा, “यह अच्छी बात है कि कलाकारों को एक विशेष सांचे में नहीं बांधा जा रहा है। किसी भी अभिनेता के लिए यह बेहतर है कि उसे कॉमेडी, ड्रामा और विलेन जैसे हर तरह के शेड्स निभाने का मौका मिले।”
अजय देवगन की ‘दृश्यम 3’ में दिखेंगे जयदीप का जलवा
जयदीप अहलावत के पास आने वाले समय में कई बड़े प्रोजेक्ट्स हैं। वे जल्द ही मनोज वाजपेयी के साथ ‘द फैमिली मैन’ के तीसरे सीजन में नजर आएंगे। इसके अलावा, प्रशंसकों को उनकी फिल्म ‘किंग’ और अजय देवगन की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘दृश्यम 3’ का भी बेसब्री से इंतजार है। इन फिल्मों में भी जयदीप अपनी अनूठी अभिनय शैली से दर्शकों को चौंकाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।


