Entertainment News: भारतीय सिनेमा के स्वर्ण युग (Golden Era) के चमकते सितारे सुदेश धवन, जिन्हें दुनिया सुदेश कुमार के नाम से जानती थी, अब हमारे बीच नहीं रहे। 1 मई को 95 वर्ष की आयु में इस दिग्गज अभिनेता ने अंतिम सांस ली। सोमवार को सांस लेने में तकलीफ होने के कारण उन्हें मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शुक्रवार की सुबह उन्होंने अपने घर पर दुनिया को अलविदा कह दिया, जिससे बॉलीवुड में शोक की लहर दौड़ गई है।
पत्नी जया धवन ने साझा किया आखिरी पलों का दर्द
सुदेश कुमार के निधन की पुष्टि उनकी पत्नी जया धवन ने एक मीडिया बातचीत के दौरान की। उन्होंने बताया कि सुदेश जी की इच्छा थी कि वे अपने आखिरी पल घर पर बिताएं। उनकी इसी इच्छा का सम्मान करते हुए परिवार उन्हें गुरुवार को अस्पताल से घर ले आया था। घर पर ही उनके लिए एक अस्थायी मेडिकल यूनिट तैयार की गई थी, लेकिन अगली सुबह उन्होंने शांति से प्राण त्याग दिए। उनके जाने से परिवार और प्रशंसक गहरे दुख में हैं।
पेशावर की गलियों से मुंबई के एल्फिंस्टन कॉलेज तक
सुदेश कुमार का जन्म आजादी से पहले वर्ष 1931 में पेशावर (अब पाकिस्तान) में हुआ था। विभाजन से पहले ही उनका परिवार मुंबई आकर बस गया था, जहाँ उन्होंने अपनी शिक्षा पूरी की। उन्होंने मुंबई के प्रतिष्ठित एल्फिंस्टन कॉलेज से विज्ञान में स्नातक (Graduation) किया था। उनके पिता का सपना था कि सुदेश पढ़-लिखकर एक सफल डॉक्टर बनें, लेकिन उनकी आंखों में सिनेमाई दुनिया के सुनहरे सपने पल रहे थे।
कपूर खानदान से रिश्ता और पृथ्वीराज कपूर के साथ शुरुआत
सुदेश कुमार का कपूर खानदान से दूर का पारिवारिक रिश्ता था। अभिनय के प्रति अपने जुनून के चलते उन्होंने पढ़ाई के बाद पृथ्वीराज कपूर के प्रसिद्ध थिएटर ग्रुप को जॉइन कर लिया। उनके फिल्मी करियर की शुरुआती कड़ियों में पृथ्वीराज कपूर द्वारा निर्देशित फिल्म ‘पैसा’ (1957) शामिल थी। थिएटर के अनुभवों ने उनके अभिनय को वह निखार दिया, जिसने आगे चलकर उन्हें बड़े पर्दे पर एक खास पहचान दिलाई।
‘छोटी बहन’ से पहचान और ‘सारंगा’ से मिली स्टारडम
यूं तो सुदेश कुमार ने कई फिल्मों में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई, लेकिन 1959 में आई ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘छोटी बहन’ ने उन्हें घर-घर में मशहूर कर दिया। हालांकि, बतौर लीड हीरो उनकी सबसे बड़ी सफलता 1961 की रोमांटिक एक्शन ड्रामा फिल्म ‘सारंगा’ रही। इस फिल्म की सफलता ने उन्हें रातों-रात सुपरस्टार बना दिया। इसके बाद उन्होंने ‘भरोसा’, ‘गृहस्थी’, ‘खानदान’ और ‘गोपी’ जैसी यादगार फिल्मों में शानदार भूमिकाएं निभाईं।
सफल निर्माता के रूप में बॉक्स ऑफिस पर गाड़े झंडे
70 के दशक में सुदेश कुमार ने अभिनय के साथ-साथ फिल्म निर्माण की दुनिया में कदम रखा। बतौर प्रोड्यूसर भी उनका करियर बेहद सफल रहा। उन्होंने ‘मन मंदिर’, ‘उलझन’, ‘बदलते रिश्ते’ और ‘जान हथेली पे’ जैसी कई सुपरहिट फिल्मों का निर्माण किया। एक अभिनेता और निर्माता के तौर पर उनका योगदान हिंदी सिनेमा के इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा। उनकी विरासत उनकी कालजयी फिल्मों के जरिए जीवित रहेगी।


