Delhi News: गोकलपुरी के 31 साल पुराने अपहरण और हत्या मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। वर्ष 1995 में 13 साल के मासूम संदीप की हत्या हुई थी। दिल्ली पुलिस ने अब फरार कातिल सलीम वास्तिक को गिरफ्तार किया है। पीड़ित परिवार को भनक नहीं थी कि कातिल जेल से बाहर आराम से जी रहा है। इस गिरफ्तारी से माता-पिता के जख्म फिर हरे हो गए हैं। परिवार ने अब उसे सीधा फांसी देने की सख्त मांग उठाई है।
पीटी टीचर ही निकला था मासूम छात्र का कातिल
संदीप के पिता सीताराम बंसल हार्डवेयर का कारोबार करते हैं। उनका परिवार शेरपुर चौक इलाके में रहता है। सीताराम ने बताया कि बेटा संदीप रामजस स्कूल में सातवीं कक्षा का छात्र था। कातिल सलीम वास्तिक उसी स्कूल में पीटी टीचर था। 20 जनवरी 1995 को संदीप आम दिनों की तरह स्कूल गया था। लेकिन वह वापस घर नहीं लौटा। परिवार ने तुरंत उसकी खोजबीन शुरू की। तभी उनके पास एक अनजान नंबर से अचानक फिरौती का फोन आया।
पैसे का इंतजाम होने से पहले ही कर दी हत्या
मासूम संदीप सीधा था। वह अपने पीटी टीचर पर बहुत भरोसा करता था। इसी का फायदा उठाकर सलीम उसे ले गया। कातिल ने फोन पर 30 हजार रुपये फिरौती मांगी। उसने पैसे बागपत जाने वाली बस में रखने को कहा। पिता सीताराम पैसों का इंतजाम कर रहे थे। तभी पुलिस ने सलीम को पकड़ लिया। पूछताछ में सलीम ने हत्या का जुर्म कबूल कर लिया। उसकी निशानदेही पर पुलिस ने नाले से संदीप का शव बरामद किया था।
परिवार को नहीं थी कातिल के फरार होने की जानकारी
मां रेनू ने बताया कि उन्होंने शुरुआत से कातिल को फांसी देने की मांग की थी। कोर्ट ने जब आजीवन कारावास की सजा सुनाई, तो लगा इंसाफ मिल गया है। परिवार को नहीं पता था कि सलीम चकमा देकर जेल से भाग गया है। 31 साल बाद उसकी दोबारा गिरफ्तारी की खबर से वे हैरान हैं। अब पीड़ित परिवार ने कोर्ट से उसे फांसी पर लटकाने की सख्त गुहार लगाई है।
भाई का दर्द: आज भी रोज आती है दोस्त की याद
संदीप के बड़े भाई संजय का दर्द भी खबर सुनकर छलक उठा। संजय ने भारी मन से कहा कि चाहे जो हो, उनका भाई अब वापस नहीं आएगा। संदीप उम्र में उनसे छह साल छोटा था। दोनों के बीच एक गहरे दोस्त जैसा रिश्ता था। संजय आज भी अपने छोटे भाई को हर रोज याद करते हैं। परिवार का साफ कहना है कि जिसने उनके कलेजे के टुकड़े को छीना है, उसे सिर्फ मौत की सजा मिलनी चाहिए।
