Bathnda News: पंजाब के बठिंडा जिले से एक रूह कपा देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक नाबालिग बच्ची के साथ लंबे समय तक यौन शोषण किए जाने का मामला प्रकाश में आया है। इस घिनौनी वारदात का खुलासा तब हुआ जब बच्ची की तबीयत अचानक बिगड़ गई और उसे अस्पताल ले जाया गया। परिजनों की सख्ती और ममतामयी पूछताछ के बाद मासूम ने अपना दर्द बयां किया, जिसके बाद इलाके में तनाव फैल गया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है, हालांकि परिवार ने शुरुआत में पुलिसिया ढिलाई के गंभीर आरोप लगाए हैं।
अचानक तबीयत बिगड़ने से हुआ खुलासा
जानकारी के अनुसार, बच्ची पिछले कई दिनों से गुमसुम थी और उसकी शारीरिक स्थिति लगातार खराब हो रही थी। जब परिजनों ने उसे डॉक्टर को दिखाया और घर पर प्यार से पूछताछ की, तो वह फूट-फूटकर रो पड़ी। बच्ची ने बताया कि उसके साथ लंबे समय से गलत व्यवहार किया जा रहा था। डरी-सहमी मासूम आरोपी के डर से अब तक खामोश थी। चिकित्सकीय जांच में शोषण की पुष्टि होने के बाद परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई और उन्होंने न्याय के लिए पुलिस का दरवाजा खटखटाया।
पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
पीड़ित परिवार का आरोप है कि घटना की शिकायत लेकर जब वे थाने पहुंचे, तो पुलिस ने अपेक्षित तत्परता नहीं दिखाई। परिजनों के मुताबिक, उनकी अनभिज्ञता का लाभ उठाकर कुछ कागजी औपचारिकताएं इस तरह पूरी की गईं कि उन्हें मामले की गंभीरता का अंदाजा ही नहीं होने दिया गया। स्थिति तब बदली जब एक स्थानीय सामाजिक संगठन ने इस मामले में हस्तक्षेप किया। संगठन के दबाव के बाद पुलिस ने सक्रियता दिखाई और मामले में पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) सहित अन्य कठोर धाराओं को जोड़ते हुए कार्रवाई को आगे बढ़ाया।
आरोपी गिरफ्तार, न्यायिक हिरासत में भेजा गया
थाना प्रभारी ने पुष्टि की है कि नाबालिग का मेडिकल परीक्षण पूरा कर लिया गया है और आरोपी को सलाखों के पीछे भेज दिया गया है। पुलिस फिलहाल मामले की गहराई से तफ्तीश कर रही है और यह जानने की कोशिश कर रही है कि क्या इस घिनौने अपराध में कोई और भी संलिप्त था। आरोपी को अदालत में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस का कहना है कि पीड़िता को उचित काउंसलिंग और चिकित्सा सहायता प्रदान की जा रही है ताकि वह इस सदमे से बाहर निकल सके।
सामाजिक जागरूकता और बच्चों की सुरक्षा
विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना समाज के लिए एक चेतावनी है। बच्चों की सुरक्षा के प्रति माता-पिता को अतिरिक्त सतर्क रहने की आवश्यकता है। अक्सर बच्चे डराए-धमकाए जाने के कारण चुप्पी साध लेते हैं, जो उनके मानसिक स्वास्थ्य के लिए घातक होता है। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि ऐसे संवेदनशील मामलों में पुलिस को बिना किसी देरी के जीरो टॉलरेंस की नीति अपनानी चाहिए। फिलहाल, पूरे बठिंडा शहर में इस घटना को लेकर गहरा आक्रोश है और लोग आरोपी के लिए कड़ी से कड़ी सजा की मांग कर रहे हैं।


