हिमाचल में बड़ा एक्शन: सुक्खू सरकार ने 31 कर्मचारियों को किया बर्खास्त, सेब बागवानों और पेंशनरों के लिए खोला खजाना

Himachal News: मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शिमला में प्रशासनिक सचिवों के साथ उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए कड़े फैसले लिए हैं। प्रदेश सरकार ने नशे के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए तस्करी में संलिप्त 31 सरकारी कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने सेब बागवानों के लंबित बिलों के भुगतान के लिए 20 करोड़ रुपये जारी करने के निर्देश दिए। सरकार का लक्ष्य कल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम पात्र व्यक्ति तक पहुँचाना है।

नशे के सौदागरों पर प्रहार: 122 सरकारी कर्मचारी रडार पर

हिमाचल प्रदेश में चिट्टे और अन्य मादक पदार्थों के बढ़ते अवैध कारोबार पर मुख्यमंत्री ने सख्त रुख अख्तियार किया है। जांच में पाया गया कि प्रदेश के कुल 122 सरकारी अधिकारी और कर्मचारी नशे के काले कारोबार में संलिप्त हैं। इनमें से 31 कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि समाज को खोखला करने वाली गतिविधियों में शामिल किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने सभी प्रशासनिक सचिवों को शेष आरोपियों पर भी कठोर कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं।

बागवानों और पेंशनरों को बड़ी राहत, भुगतान के लिए चार दिन की डेडलाइन

सेब बागवानों की लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करते हुए एमआईएस के तहत बकाया राशि जारी कर दी गई है। मुख्यमंत्री ने चतुर्थ श्रेणी के पेंशनरों को 15 अप्रैल को की गई घोषणा के अनुसार एरियर भुगतान का आदेश दिया। उन्होंने चिकित्सा प्रतिपूर्ति दावों (Medical Reimbursement Claims) के त्वरित निपटान पर जोर दिया है। मुख्यमंत्री ने सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि सभी लंबित देनदारियों का निपटारा आगामी चार दिनों के भीतर सुनिश्चित किया जाए।

प्रशासनिक जवाबदेही तय: डीडीओ पर गिरेगी गाज

सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की कोताही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने आहरण एवं वितरण अधिकारियों (डीडीओ) को जवाबदेह बनाने के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं। चार दिनों के भीतर भुगतान प्रक्रिया पूरी कर मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) को अनुपालन रिपोर्ट सौंपनी होगी। यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है, तो संबंधित डीडीओ के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। बैठक में मुख्य सचिव संजय गुप्ता सहित कई वरिष्ठ अतिरिक्त मुख्य सचिव और सचिव मौजूद रहे।

कल्याणकारी योजनाओं की समीक्षा और पारदर्शिता पर जोर

बैठक के दौरान विभिन्न विभागों द्वारा संचालित सामाजिक सुरक्षा और जन कल्याण योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बजट का सही आवंटन और समयबद्ध उपयोग सुनिश्चित किया जाए। सरकार का ध्यान विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के उत्थान पर है। पारदर्शिता लाने के लिए डिजिटल गवर्नेंस को बढ़ावा दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भ्रष्टाचार और नशा मुक्त प्रशासन ही प्रदेश के विकास की नई नींव रखेगा।

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