Himachal News: हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय केंद्र धर्मशाला में अर्थशास्त्र विभाग द्वारा एक महत्वपूर्ण विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों और महिला रोजगार के भविष्य पर गहन चर्चा हुई। मुख्य वक्ता डॉ. कमल सिंह ने चेतावनी दी कि यदि राजस्व घाटा अनुदान को समाप्त किया गया, तो राज्यों पर वित्तीय संकट गहरा सकता है। उन्होंने महिला सशक्तिकरण के लिए सरकारी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन और निजी संस्थानों के सहयोग पर विशेष बल दिया।
राज्यों की वित्तीय सेहत पर मंडरा रहा है संकट
हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के सहायक आचार्य डॉ. कमल सिंह ने संवैधानिक बारीकियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 280 के तहत वित्त आयोग केंद्र और राज्यों के बीच राजस्व बंटवारे का आधार तय करता है। डॉ. सिंह ने आगाह किया कि 16वें वित्त आयोग (2026-31) का राजस्व घाटा अनुदान खत्म करने का प्रस्ताव चिंताजनक है। इससे पहाड़ी और छोटे राज्यों की विकास योजनाओं के लिए धन की कमी हो सकती है और उन पर कर्ज का दबाव बढ़ेगा।
महिला रोजगार: सशक्तिकरण की असली चाबी
व्याख्यान के दौरान महिला रोजगार के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया गया। डॉ. कमल सिंह ने तर्क दिया कि महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाना समाज की प्रगति के लिए अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि केवल योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें स्थानीय स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करना होगा। यदि निजी क्षेत्र और स्थानीय निकाय मिलकर काम करें, तो रोजगार के अवसरों में भारी वृद्धि हो सकती है। आर्थिक आत्मनिर्भरता ही महिलाओं के सामाजिक स्तर को ऊपर उठाने का एकमात्र विकल्प है।
शिक्षाविदों का जमावड़ा और डॉ. कमल सिंह का सम्मान
इस शैक्षणिक कार्यक्रम में प्रदेश के कई दिग्गज शिक्षाविदों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। क्षेत्रीय केंद्र के निदेशक प्रो. कुलदीप कुमार अत्री की अध्यक्षता में आयोजित इस सत्र में प्रो. डी.पी. वर्मा और डॉ. किशोर कुमार जैसे विद्वानों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम के सफल समापन पर डॉ. संदीप कुमार धीमान और डॉ. राम रतन ने मुख्य वक्ता के विचारों की सराहना की। अंत में विभाग की ओर से डॉ. कमल सिंह को स्मृति चिन्ह और प्रमाण-पत्र देकर उनके बहुमूल्य योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

