कोसी-गंडक परियोजना पर भारत-नेपाल के बीच बड़ी सहमति, बाढ़ से निपटने के लिए काठमांडू में बनी रणनीति

International News: नेपाल की राजधानी काठमांडू में भारत-नेपाल कोसी एवं गंडक परियोजनाओं की संयुक्त समिति की 11वीं बैठक संपन्न हुई। इस उच्च स्तरीय बैठक में सीमांचल और उत्तर बिहार के लिए महत्वपूर्ण जल प्रबंधन मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई। भारतीय पक्ष का नेतृत्व बिहार जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव संतोष कुमार मल्ल ने किया, जबकि नेपाली पक्ष का प्रतिनिधित्व महानिदेशक मित्र बराल ने किया। दोनों देशों ने तकनीकी और प्रशासनिक बाधाओं को दूर करने के लिए ऐतिहासिक सहमति जताई है।

अतिक्रमण मुक्त होंगे कोसी और गंडक बराज क्षेत्र

बैठक का सबसे महत्वपूर्ण फैसला कोसी और गंडक बराज क्षेत्रों को अतिक्रमण मुक्त कराना रहा। नेपाल के प्रतिनिधिमंडल ने पश्चिमी कोसी मुख्य नहर, पूर्वी और पश्चिमी तटबंधों और वाल्मिकीनगर स्थित गंडक बराज क्षेत्र से अवैध कब्जों को शीघ्र हटाने पर सहमति दी है। इसके अलावा, पश्चिमी कोसी मुख्य नहर के बांधों पर लगे बिजली के खंभों को भी स्थानांतरित किया जाएगा। इससे मानसून के दौरान नहरों और बांधों के संचालन में आने वाली बाधाएं पूरी तरह खत्म हो जाएंगी।

2026 की बाढ़ से पहले कटाव निरोधक कार्य

आगामी 2026 की बाढ़ को देखते हुए वीरपुर परिक्षेत्र के पूर्वी एफ्लेक्स बांध में कटाव निरोधक कार्यों पर विशेष चर्चा हुई। कोसी वनटप्पू क्षेत्र में मरम्मत के लिए आवश्यक बालू, मिट्टी और सिल्ट के उपयोग पर नेपाली अधिकारियों ने अपनी मंजूरी दे दी है। साथ ही, बाढ़ संघर्षात्मक कार्यों के लिए निर्माण सामग्री ले जाने वाले वाहनों के दिन-रात आवागमन को भी अनुमति मिल गई है। इससे आपदा प्रबंधन से जुड़ी तैयारियां अब युद्ध स्तर पर समय से पूरी की जा सकेंगी।

जीपीएस तकनीक से होगा लीज भूमि का सीमांकन

कोसी परियोजना के तहत आने वाली लीज भूमि के विवादों को सुलझाने के लिए अब जीपीएस तकनीक का सहारा लिया जाएगा। बैठक में तय हुआ कि एक निश्चित समय सीमा के भीतर भौतिक और डिजिटल रूप से भूमि का सीमांकन पूरा कर लिया जाएगा। नेपाली पक्ष ने कोसी परियोजना के वाहनों पर स्थानीय नगरपालिकाओं द्वारा लगाए जा रहे टैक्स को द्विपक्षीय समझौते के खिलाफ माना है। इसे तुरंत रोकने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने का आश्वासन भी नेपाल सरकार की ओर से दिया गया है।

डाटा शेयरिंग और पायलट चैनल का निर्माण

बाढ़ के सटीक पूर्वानुमान के लिए भारत और नेपाल अब वर्षा और नदियों के जलस्तर के आंकड़े साझा करेंगे। भारतीय पक्ष ने नदी की धारा को केंद्र में रखने के लिए 250 किलोमीटर लंबे पायलट चैनल के निर्माण और ‘शाल लूसिनिंग’ कार्य की जानकारी दी। नेपाल को भविष्य में सैटेलाइट इमेजरी भी उपलब्ध कराई जाएगी। इस बैठक में भारत सरकार के विदेश मंत्रालय और जलशक्ति मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों सहित बिहार सरकार के कई अभियंता प्रमुखों ने भाग लेकर सहयोग की नई इबारत लिखी।

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