गुरुग्राम में खौफनाक मंजर: टैक्सी ड्राइवरों ने स्कूली छात्रा को घेरा, 20 बार कॉल करने पर भी नहीं पहुंची पुलिस

Haryana News: साइबर सिटी गुरुग्राम के सोहना रोड पर सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलने वाली एक बेहद डरावनी घटना सामने आई है। यहां टैक्सी ड्राइवरों की भीड़ ने एक स्कूली छात्रा को बीच सड़क पर घेरकर घंटों परेशान किया। घबराई हुई मासूम बच्ची ने खुद को कार के अंदर लॉक कर लिया और लगातार पुलिस से मदद की गुहार लगाती रही। हैरानी की बात यह है कि करीब 20 बार कॉल करने के बावजूद पुलिस की टीम आधे घंटे से ज्यादा समय तक मौके पर नहीं पहुंची।

हादसे के बाद टैक्सी चालकों का तांडव

यह पूरा विवाद एक कार और टैक्सी के बीच हुई मामूली टक्कर के बाद शुरू हुआ। टक्कर होते ही मौके पर मौजूद दर्जनों टैक्सी चालक इकट्ठा हो गए और छात्रा की कार को चारों तरफ से घेर लिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, स्थिति काफी तनावपूर्ण हो गई थी। गुस्साई भीड़ कार का दरवाजा खोलने की कोशिश कर रही थी। अपनी सुरक्षा को खतरे में देख छात्रा ने बुद्धिमानी दिखाई और तुरंत गाड़ी के सभी दरवाजे भीतर से लॉक कर लिए।

बेबस मां और रोती हुई बेटी का वीडियो कॉल

पीड़िता की मां ने बताया कि उनकी बेटी ने पुलिस को पहला फोन शाम 5 बजकर 2 मिनट पर किया था। पुलिस ने 5 बजकर 10 मिनट पर उसकी लोकेशन पूछी, लेकिन मदद के नाम पर कोई नहीं आया। जब छात्रा को लगा कि उसकी जान को खतरा है, तो उसने अपनी मां को वीडियो कॉल कर रोते हुए आपबीती सुनाई। मां का दावा है कि उन्होंने कंट्रोल रूम को 20 से अधिक बार फोन किया, लेकिन पुलिस 37 मिनट की देरी से पहुंची।

मारपीट और जबरन वसूली का संगीन आरोप

छात्रा की मां ने टैक्सी चालकों पर कार चालक के साथ मारपीट करने का भी आरोप लगाया है। डरी-सहमी छात्रा पर मौके पर ही समझौता करने का दबाव बनाया गया। अपनी जान छुड़ाने के लिए नाबालिग लड़की ने टैक्सी ड्राइवर को 2000 रुपये भी दे दिए। इस पूरी घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। लोग गुरुग्राम पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं कि आखिर आपात स्थिति में रिस्पॉन्स टाइम इतना खराब क्यों है?

पुलिस की लापरवाही पर भड़का जनता का गुस्सा

सोशल मीडिया पर पुलिस की इस सुस्ती को लेकर लोगों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। यूजर्स का कहना है कि 10 मिनट में पिज्जा की डिलीवरी हो जाती है, लेकिन एक बच्ची की जान बचाने में पुलिस को 37 मिनट लग गए। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामला सोशल मीडिया टीम के संज्ञान में आ चुका है। फिलहाल विभाग इस देरी के कारणों की जांच कर रहा है। दोषी पाए जाने वाले टैक्सी चालकों और लापरवाह पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई की बात कही गई है।

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