बालेन शाह का पहला विदेशी दौरा भारत या चीन? दिल्ली और बीजिंग के बीच फंसा नेपाल, मोदी ने भेजा खास न्योता

Nepal News: नेपाल में सत्ता परिवर्तन के बाद अब पूरी दुनिया की नजरें बालेन शाह सरकार की विदेश नीति पर टिकी हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बालेन शाह को भारत आने का औपचारिक न्योता दिया है। शाह ने इस निमंत्रण को स्वीकार भी कर लिया है। हालांकि, उनके दौरे की आधिकारिक तारीखें अभी तय होना बाकी हैं। इस बीच भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी अगले महीने काठमांडू का दौरा कर सकते हैं। यह यात्रा दोनों देशों के बीच भविष्य के रिश्तों की नई इबारत लिखेगी।

विक्रम मिसरी तय करेंगे द्विपक्षीय वार्ता का एजेंडा

भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिसरी का नेपाल दौरा 11-12 मई के बीच होने की संभावना है। कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार मिसरी आधिकारिक तौर पर पीएम मोदी का न्योता लेकर बालेन शाह से मिलेंगे। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य नई सरकार की प्राथमिकताओं और विजन को समझना है। किसी भी बड़े मंत्रिस्तरीय दौरे से पहले दोनों पक्ष आपसी सहयोग के क्षेत्रों पर चर्चा करना चाहते हैं। यह दौरा बालेन शाह के भारत दौरे की जमीन तैयार करेगा।

चीन और अमेरिका की सक्रियता ने बढ़ाई हलचल

नेपाल की बालेन शाह सरकार इस समय वैश्विक शक्तियों के केंद्र में है। वर्तमान में नेपाल सरकार अमेरिका और चीन के शीर्ष अधिकारियों की मेजबानी में काफी व्यस्त है। भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने हाल ही में भारत-नेपाल संबंधों पर चर्चा की पुष्टि की है। विक्रम मिसरी ने नेपाली पत्रकारों के एक दल से मुलाकात कर भावी रिश्तों पर विस्तार से बात की है। दिल्ली अब नेपाल के साथ अपने पुराने और प्रगाढ़ संबंधों को नई ऊर्जा देने की कोशिश में है।

भारत-नेपाल के बीच हाई लेवल संपर्क की शुरुआत

बालेन शाह के दौरे का प्रस्ताव तब चर्चा में आया जब विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मॉरीशस में नेपाली विदेश मंत्री शिशिर खनाल से मुलाकात की। शाह के सत्ता संभालने के बाद यह दोनों देशों के बीच पहला उच्च स्तरीय संपर्क था। इसी मुलाकात के दौरान द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर सहमति बनी थी। अब विक्रम मिसरी की प्रस्तावित यात्रा से यह तय होगा कि बालेन शाह की पहली विदेश यात्रा दिल्ली की होगी या किसी अन्य राजधानी की।

भारत और चीन के बीच संतुलन की चुनौती

नेपाल के राजनीतिक इतिहास में भारत और चीन के प्रति झुकाव हमेशा चर्चा का विषय रहता है। आमतौर पर नेपाली कांग्रेस भारत के करीब मानी जाती है, जबकि वामपंथी दल चीन की ओर झुकाव रखते हैं। बालेन शाह की पहली विदेश यात्रा से यह स्पष्ट हो जाएगा कि उनकी प्राथमिकता में कौन है। कयास लगाए जा रहे हैं कि वह परंपरा के अनुसार पहले भारत आएंगे। हालांकि, बीजिंग भी नेपाल में अपना प्रभाव बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है।

नेपाल के लिए भारत क्यों है अपरिहार्य?

भारत और नेपाल के बीच केवल कूटनीतिक संबंध ही नहीं, बल्कि ‘रोटी-बेटी’ का गहरा रिश्ता है। नेपाल अपनी खाद्य जरूरतों के लिए पूरी तरह भारत पर निर्भर है। चावल, गेहूं और दवाओं जैसी बुनियादी सामग्री भारत से ही वहां पहुंचती है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि नेपाल पेट्रोल और डीजल का सीधा आयात नहीं करता है। उसे अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए शत-प्रतिशत रिफाइंड तेल भारत से ही मिलता है। यह निर्भरता भारत को नेपाल के लिए सबसे खास सहयोगी बनाती है।

भावी रिश्तों को लेकर नेपाली मीडिया में अटकलें

नेपाल के राजनीतिक हलकों में इस समय भारत के साथ सहयोग बढ़ाने को लेकर काफी उत्साह है। दोनों ही पक्ष इस दौरे को कई क्षेत्रों में विकास के नए अवसरों के रूप में देख रहे हैं। बिजली व्यापार, सड़क कनेक्टिविटी और जल संसाधन प्रबंधन जैसे मुद्दों पर ठोस बातचीत होने की उम्मीद है। बालेन शाह सरकार के सामने अब चुनौती यह है कि वह भारत के साथ अपने ऐतिहासिक रिश्तों को और कितना ऊंचे मुकाम पर ले जा सकती है।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
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