International News: अमेरिका की नॉर्थ कैरोलिना स्टेट यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में भारतीय मूल के परोपकारी अनिल कोचर ने एक ऐतिहासिक घोषणा की है। उन्होंने विल्सन कॉलेज ऑफ टेक्सटाइल्स के 176 स्नातक छात्रों के अंतिम वर्ष के शिक्षा ऋण (Education Loan) का भुगतान करने का जिम्मा उठाया है। यह घोषणा रैले स्थित रेनॉल्ड्स कोलिजियम में की गई, जिससे वहां मौजूद छात्र और उनके परिवार भावुक हो गए। कोचर ने यह कदम अपने दिवंगत पिता की स्मृति में उठाया है।
पिता प्रकाश चंद कोचर को दी श्रद्धांजलि
अनिल कोचर इस दीक्षांत समारोह में मुख्य वक्ता के तौर पर आमंत्रित थे। उन्होंने बताया कि उनके पिता प्रकाश चंद कोचर 1946 में पंजाब से अमेरिका आए थे। उन्होंने इसी यूनिवर्सिटी से टेक्सटाइल मैन्युफैक्चरिंग की शिक्षा ली थी। कोचर ने अपने भाषण में कहा कि उनके पिता को इस संस्थान ने केवल डिग्री नहीं दी, बल्कि एक ऐसा अवसर प्रदान किया जिसने उनके पूरे परिवार का भविष्य बदल दिया। यह दान उसी विरासत का सम्मान है।
छात्रों के लिए सपनों की आजादी
अनिल कोचर ने 2025-26 शैक्षणिक वर्ष के छात्रों के लिए इस बड़ी राहत का ऐलान किया। उन्होंने छात्रों से कहा कि वह चाहते हैं कि युवा स्नातक केवल डिग्री लेकर न जाएं, बल्कि कर्ज के बोझ से मुक्त होकर अपने सपनों को पूरा करने की आजादी भी साथ ले जाएं। उनकी इस घोषणा के बाद पूरे सभागार में मौजूद लोगों ने खड़े होकर तालियां बजाईं। उन्होंने छात्रों को जीवन में निडर होकर जोखिम लेने के लिए प्रेरित किया।
प्रवासी परिवारों के लिए बड़ी राहत
इस योजना का लाभ कुल 176 स्नातक छात्रों को मिलेगा। इसके अलावा, इस वर्ष 26 मास्टर्स छात्रों ने भी अपनी डिग्री पूरी की है। फैशन और टेक्सटाइल मैनेजमेंट की छात्रा एलिसा डी’कोस्टा ने इस मदद को अपने परिवार के लिए बहुत बड़ी राहत बताया है। उन्होंने कहा कि एक प्रवासी परिवार के लिए शिक्षा ऋण का बोझ उतारना एक सपने जैसा है। यूनिवर्सिटी प्रशासन के साथ मिलकर कोचर दंपति ने इस पूरी वित्तीय योजना को तैयार किया है।
80 साल पहले पंजाब से शुरू हुआ सफर
अनिल कोचर ने अपने पिता के संघर्ष को याद करते हुए बताया कि 80 साल पहले उनके पिता सिर्फ उम्मीद लेकर अमेरिका पहुंचे थे। प्रकाश चंद कोचर का निधन 1985 में हुआ था, लेकिन उनकी दी हुई शिक्षा और संस्कार आज भी परिवार के साथ हैं। अनिल और उनकी पत्नी मेरिलिन ने फाइनेंशियल एड विभाग के साथ पहले ही सभी तकनीकी पहलुओं पर चर्चा कर ली थी, ताकि छात्रों को सीधे तौर पर इस वित्तीय सहायता का लाभ मिल सके।
वैश्विक स्तर पर सराहना
भारतीय मूल के उद्यमी द्वारा की गई इस उदार पहल की वैश्विक स्तर पर सराहना हो रही है। यह पहली बार नहीं है जब किसी भारतीय मूल के व्यक्ति ने अमेरिकी संस्थानों में इस तरह की बड़ी सहायता दी हो। अनिल कोचर के इस कदम से न केवल छात्रों का आर्थिक बोझ कम होगा, बल्कि यह भारत और अमेरिका के बीच शैक्षिक और सांस्कृतिक संबंधों को भी नई मजबूती प्रदान करेगा। यूनिवर्सिटी ने इसे अपने इतिहास के सबसे यादगार दीक्षांत समारोहों में से एक बताया है।

