ईरान युद्ध के बीच क्या भारत में लगेगा ‘आर्थिक लॉकडाउन’? आपकी एक छोटी सी शपथ बचाएगी देश के अरबों रुपये!

New Delhi News: ईरान युद्ध के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बड़े संकट के बादल मंडरा रहे हैं। हालांकि भारत अभी इस संकट से काफी हद तक बचा हुआ है। लेकिन अगर युद्ध लंबा खिंचता है, तो देश की आर्थिक स्थिति बिगड़ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी मुद्रा भंडार बचाने के लिए हमें अनावश्यक आयात कम करना होगा। खासकर निवेश के लिए सोना खरीदने पर एक साल का प्रतिबंध देश को बड़ी मजबूती दे सकता है।

इतिहास गवाह है: जब जनता के संयम ने बचाई देश की साख

संकट के समय नागरिकों का अनुशासन ही देश की सबसे बड़ी ताकत बनता है। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटेन में खाद्य संकट गहरा गया था। तब प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल ने ‘डिग फॉर विक्ट्री’ अभियान शुरू किया था। उन्होंने लोगों को अपने बगीचों और पार्कों में सब्जियां उगाने के लिए प्रेरित किया। इस छोटे से प्रयास ने ब्रिटेन की खाद्य सुरक्षा में निर्णायक भूमिका निभाई थी। आज भारत को भी इसी तरह के आर्थिक राष्ट्रवाद और सामूहिक संकल्प की जरूरत है।

भारत का इतिहास भी ऐसी गौरवशाली मिसालों से भरा हुआ है। साल 1965 के अन्न संकट के दौरान प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने सप्ताह में एक वक्त का भोजन छोड़ने की अपील की थी। पूरा देश उनके एक आह्वान पर उठ खड़ा हुआ था। इसी तरह 1973 के तेल संकट में इंदिरा गांधी ने ईंधन की बचत का मंत्र दिया था। आज फिर वक्त आ गया है कि हम सोने जैसे गैर-जरूरी निवेश को टालकर विदेशी मुद्रा की बचत करें।

सोने में निवेश: देश की जेब पर 2.56 लाख करोड़ का बोझ

भारत में सोने की कुल मांग का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा केवल निवेशकों का होता है। यह निवेश के नाम पर खर्च होने वाली राशि करीब 2 लाख 56 हजार करोड़ रुपये से भी अधिक है। अगर यह पैसा फिजिकल गोल्ड की जगह देश के भीतर निवेश हो, तो तस्वीर बदल सकती है। इतनी बड़ी राशि से तीन बुलेट ट्रेन कॉरिडोर तैयार किए जा सकते हैं। साथ ही राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन को अगले पांच वर्षों तक आसानी से फंड किया जा सकता है।

रवींद्रनाथ टैगोर ने कहा था कि आभूषण केवल सौंदर्य नहीं, बल्कि परिवार की यादें होते हैं। इसलिए शादी-विवाह के लिए जरूरी गहनों की खरीद पर कोई मनाही नहीं है। लेकिन जो लोग केवल मुनाफे के लिए सोना जमा करते हैं, उन्हें अब अन्य विकल्पों पर विचार करना चाहिए। सोना पिछले एक साल में बहुत अधिक उतार-चढ़ाव देख चुका है। अब समय है कि निवेशक अपने पैसे को भारत की विकास दर के साथ जोड़कर इसे और अधिक बढ़ाएं।

शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड: निवेश के बेहतर विकल्प

आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड सोने से बेहतर रिटर्न दे सकते हैं। शेयर बाजार में निवेश करने से आपका पैसा देश की अर्थव्यवस्था में ही घूमता रहता है। जो लोग सीधा जोखिम नहीं लेना चाहते, वे म्यूचुअल फंड का रास्ता चुन सकते हैं। यह निवेश न केवल आपको अच्छा मुनाफा देगा, बल्कि आर्थिक राष्ट्रवाद को भी बढ़ावा देगा। इसके अलावा फिजिकल गोल्ड की जगह ‘गोल्ड ईटीएफ’ भी एक बहुत सुरक्षित और आधुनिक विकल्प है।

रियल एस्टेट में निवेश करना भी एक शानदार मौका हो सकता है। अगर आपके पास जमीन या फ्लैट खरीदने के लिए बड़ा फंड नहीं है, तो आप REIT (रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट) में पैसा लगा सकते हैं। यह म्यूचुअल फंड की तरह काम करता है, जहां आपका पैसा कमर्शियल प्रॉपर्टीज में निवेश किया जाता है। इससे आपको नियमित आय और प्रॉपर्टी की बढ़ती कीमतों का लाभ मिलता है। यह विकल्प सोने की तुलना में अर्थव्यवस्था को अधिक गति प्रदान करता है।

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