प्रमथ नाथ बोस जयंती: वो महान वैज्ञानिक जिन्होंने भारत में टाटा स्टील की नींव रखी

Jharkhand News: भारत के महान वैज्ञानिक प्रमथ नाथ बोस (पीएन बोस) की आज जयंती है। उन्होंने देश के औद्योगिक विकास में बहुत बड़ा योगदान दिया था। उनकी दूरदर्शिता के कारण ही जमशेदपुर में टाटा स्टील की स्थापना हो सकी थी। मयूरभंज में लौह अयस्क खोजने का श्रेय भी उन्हें ही जाता है। इस ऐतिहासिक खोज ने भारत को वैश्विक इस्पात मानचित्र पर मजबूत पहचान दिलाई थी।

जमशेदजी टाटा को ऐतिहासिक पत्र

पीएन बोस ने मयूरभंज में विशाल लौह अयस्क भंडार खोजा था। उन्होंने 24 फरवरी 1904 को जमशेदजी टाटा को पत्र लिखा था। इस पत्र में उन्होंने खोज की विस्तृत जानकारी दी थी। उस समय टाटा समूह मध्य प्रदेश में प्लांट लगाने का विचार कर रहा था। लेकिन बोस के वैज्ञानिक साक्ष्यों ने स्थिति बदल दी। इसके बाद प्लांट के लिए साकची को चुना गया।

जीएसआई और विज्ञान में योगदान

प्रमथ नाथ बोस का जन्म 12 मई 1855 को पश्चिम बंगाल में हुआ था। वह लंदन में गिलक्रिस्ट स्कॉलरशिप पाने वाले शुरुआती छात्रों में से थे। उन्होंने अपनी पढ़ाई रॉयल स्कूल ऑफ माइंस से पूरी की थी। वह भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) में काम करने वाले पहले भारतीय अधिकारियों में शामिल थे। विज्ञान के क्षेत्र में उनका काम बेहद शानदार रहा है।

पेट्रोलियम खोज और स्वदेशी उद्यम

पीएन बोस का काम केवल लौह अयस्क खोजने तक ही सीमित नहीं था। असम राज्य में पेट्रोलियम की सफल खोज का पूरा श्रेय भी उन्हें दिया जाता है। इसके अलावा उन्होंने देश में पहली साबुन फैक्ट्री स्थापित की थी। उनका मुख्य उद्देश्य स्वदेशी उद्यम को मजबूती देना था। उनका यह ऐतिहासिक कदम भारत को आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाने की दिशा में था।

तकनीकी शिक्षा को दिया बढ़ावा

पीएन बोस का मानना था कि वैज्ञानिक शिक्षा के बिना देश का विकास संभव नहीं है। उन्होंने बंगाल टेक्निकल इंस्टीट्यूट की स्थापना में अहम भूमिका निभाई थी। आज इस संस्थान को जादवपुर विश्वविद्यालय के नाम से जाना जाता है। वह इस संस्थान के पहले मानद प्रिंसिपल भी रहे। उन्होंने देश के युवाओं को तकनीकी कौशल सिखाने पर सबसे ज्यादा जोर दिया था।

आत्मनिर्भर भारत के पहले शिल्पकार

देश के राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने उनके योगदान की सराहना की थी। उन्होंने कहा था कि बोस ने औद्योगिक प्रगति की असीम संभावनाओं को देख लिया था। पीएन बोस सिर्फ वैज्ञानिक नहीं थे, बल्कि वह आत्मनिर्भर भारत के शुरुआती शिल्पकार थे। उन्होंने प्राकृतिक संसाधनों और तकनीकी ज्ञान को मिलाकर भारतीय उद्योगों को नई राह दिखाई। उनका जीवन आज भी हम सभी को प्रेरित करता है।

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