UPI फ्रॉड से बचना है तो सावधान: ठगों के इन 3 खतरनाक तरीकों से खाली हो सकता है आपका बैंक खाता

India News: भारत में डिजिटल क्रांति के साथ यूपीआई (UPI) भुगतान ने लेनदेन को बेहद सुगम बना दिया है, लेकिन इसी के साथ साइबर ठगी के मामलों में भी भारी उछाल आया है। ठग अब नए और शातिर तरीकों से लोगों की मेहनत की कमाई पर सेंध लगा रहे हैं। वर्तमान में फेक क्यूआर कोड, स्क्रीन शेयरिंग ऐप्स और नकली कस्टमर केयर के जरिए लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, आपकी एक छोटी सी लापरवाही या अनजान लिंक पर क्लिक करना आपके बैंक अकाउंट को पूरी तरह खाली कर सकता है, इसलिए सतर्कता अनिवार्य है।

फेक क्यूआर कोड का मायाजाल और ‘पिन’ की गलती

साइबर अपराधी आजकल सबसे ज्यादा फेक क्यूआर कोड (QR Code) का सहारा ले रहे हैं। अक्सर ठग खुद को दुकानदार या खरीदार बताकर लोगों को कोड भेजते हैं और दावा करते हैं कि इसे स्कैन करने पर पैसे आपके खाते में आएंगे। हालांकि, डिजिटल पेमेंट का बुनियादी नियम है कि पैसे प्राप्त करने के लिए कभी भी पिन (PIN) डालने या कोड स्कैन करने की आवश्यकता नहीं होती। जैसे ही यूजर लालच में आकर पिन दर्ज करता है, उसके खाते से पैसे कट जाते हैं। अनजान क्यूआर कोड को स्कैन करना आर्थिक जोखिम को सीधा आमंत्रण देना है।

स्क्रीन शेयरिंग ऐप्स: आपके फोन का रिमोट कंट्रोल

ठगी का दूसरा सबसे खतरनाक तरीका ‘रिमोट एक्सेस’ या स्क्रीन शेयरिंग ऐप्स का इस्तेमाल है। साइबर ठग फर्जी बैंक अधिकारी बनकर पीड़ितों को एनीडेस्क (AnyDesk) या टीमव्यूअर (TeamViewer) जैसे ऐप डाउनलोड करने के लिए फुसलाते हैं। एक बार ऐप इंस्टॉल होने और एक्सेस मिलने के बाद, अपराधी आपके फोन की हर गतिविधि को देख सकते हैं। वे आपके यूपीआई ऐप का पासवर्ड और ओटीपी आसानी से चुराकर ट्रांजेक्शन कर देते हैं। किसी भी अनजान व्यक्ति के निर्देश पर रिमोट ऐप डाउनलोड करना बेहद घातक साबित हो सकता है।

फर्जी हेल्पलाइन नंबर और संदिग्ध लिंक से रहें दूर

इंटरनेट पर उपलब्ध हर कस्टमर केयर नंबर सही नहीं होता। अपराधी गूगल सर्च पर फर्जी हेल्पलाइन नंबर डालकर लोगों को फंसाते हैं। जब कोई यूजर इन नंबरों पर कॉल करता है, तो उनसे निजी बैंकिंग जानकारी या ओटीपी मांगा जाता है। इसके अलावा, व्हाट्सएप और एसएमएस के जरिए भेजे जाने वाले ‘पुरस्कार’ या ‘केवाईसी अपडेट’ के फर्जी लिंक भी फोन हैक करने का जरिया बनते हैं। विशेषज्ञों की सलाह है कि हमेशा बैंक की आधिकारिक वेबसाइट या मोबाइल ऐप से ही संपर्क सूत्र प्राप्त करें।

साइबर सुरक्षा के लिए अपनाएं ये जरूरी सावधानियां

डिजिटल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अपना यूपीआई पिन और ओटीपी कभी किसी के साथ साझा न करें। समय-समय पर अपने बैंकिंग पासवर्ड बदलते रहें और केवल आधिकारिक स्टोर से ही वित्तीय ऐप्स डाउनलोड करें। यदि आप किसी साइबर धोखाधड़ी का शिकार होते हैं, तो बिना देरी किए राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या आधिकारिक पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। याद रखें कि आपकी जागरूकता ही साइबर अपराधियों के खिलाफ सबसे सशक्त सुरक्षा कवच है, जिससे आप अपनी जमापूंजी सुरक्षित रख सकते हैं।

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