भोपाल गैस त्रासदी की वो एक तस्वीर जिसने दुनिया को हिला दिया, वो आंखें अब हमेशा के लिए बंद हो गईं, पद्म श्री रघु राय का 83 की उम्र में निधन

Delhi News: भारतीय फोटो पत्रकारिता के जनक कहे जाने वाले पद्म श्री रघु राय का रविवार को 83 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके परिवार ने उनके आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट के जरिए इस दुखद समाचार की पुष्टि की। अपने कैमरे से देश की नब्ज पकड़ने वाले और कई ऐतिहासिक पलों को अमर करने वाले इस दिग्गज का अंतिम संस्कार आज शाम 4 बजे दिल्ली के लोधी श्मशान घाट में किया जाएगा।

भोपाल की उस तस्वीर ने दुनिया में मचाई थी हलचल

रघु राय की सबसे चर्चित तस्वीरों में भोपाल गैस त्रासदी पर आधारित वह मार्मिक फोटो शामिल है जिसमें एक मासूम बच्चे का निर्जीव शरीर दिखाई देता है। इस एक तस्वीर ने पूरी दुनिया को भोपाल में हुई त्रासदी की भयावहता का अहसास कराया। इतना ही नहीं, इसने वैश्विक स्तर पर कॉरपोरेट जिम्मेदारी को लेकर एक गंभीर बहस भी शुरू कर दी थी जो आज भी जारी है।

इंदिरा गांधी और मदर टेरेसा पर बेजोड़ काम

अपने पांच दशक लंबे करियर में रघु राय ने कई बड़ी हस्तियों को अपने कैमरे में कैद किया। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के राजनीतिक और निजी जीवन के कई अनमोल क्षणों को अपनी तस्वीरों में समेटा। मदर टेरेसा पर उनकी खींची तस्वीरें इतनी प्रभावशाली थीं कि उनके संत घोषित होने से पहले ही रघु राय ने ‘Saint Mother’ के नाम से एक किताब प्रकाशित कर दी थी।

1962 में शुरू किया था शानदार सफर

साल 1942 में अविभाजित भारत के झंग में जन्मे रघु राय ने महज 20 साल की उम्र में 1962 में फोटोग्राफी को अपना पूर्णकालिक पेशा बनाने का फैसला किया। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रतिष्ठित अखबार ‘द स्टेट्समैन’ से की और उसके बाद लंबे समय तक ‘इंडिया टुडे’ पत्रिका के साथ जुड़े रहे। वे विश्व प्रसिद्ध फोटोग्राफी संस्थान ‘मैग्नम फोटोज’ से जुड़ने वाले भारत के चुनिंदा शुरुआती फोटोग्राफरों की सूची में शामिल थे।

पद्म श्री और 18 से ज्यादा किताबों की विरासत

रघु राय की फोटोग्राफी केवल खबरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि वे इतिहास के जीवंत दस्तावेज बन गईं। उनकी इसी अद्वितीय प्रतिभा के लिए सरकार ने वर्ष 1971 में उन्हें पद्म श्री के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान से नवाजा। अपने सक्रिय जीवनकाल में उन्होंने 18 से अधिक किताबें लिखीं और प्रकाशित कीं। उनके निधन से न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया की फोटो पत्रकारिता ने एक मार्गदर्शक स्तंभ खो दिया है।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
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