Delhi News: दिल्ली परिवहन निगम (DTC) की बसों में महिला सुरक्षा के लिए तैनात करीब 2900 होमगार्ड इन दिनों भीषण आर्थिक तंगी से गुजर रहे हैं। आलम यह है कि पिछले कई महीनों से उन्हें वेतन नहीं मिला है, जिससे उनके परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। वेतन में देरी की यह समस्या किसी एक-दो महीने की नहीं, बल्कि पिछले कई वर्षों से लगातार बनी हुई है। तीन अलग-अलग विभागों की फाइलों में उलझकर इन जवानों का मानदेय कहीं खो गया है, जिसका सीधा असर उनके बच्चों की पढ़ाई और बीमार परिजनों के इलाज पर पड़ रहा है।
तीन विभागों की फाइलों के फेर में फंसी जवानों की गाढ़ी कमाई
होमगार्डों के वेतन भुगतान की प्रक्रिया बेहद जटिल और समय लेने वाली है। सबसे पहले संबंधित डीटीसी डिपो के मैनेजर वेतन की फाइल तैयार करते हैं, जो होमगार्ड के जिला स्टाफ अधिकारी के पास जांच के लिए जाती है। वहां से फाइल होमगार्ड मुख्यालय और फिर डीटीसी मुख्यालय भेजी जाती है। इसके बाद फाइल परिवहन विभाग पहुंचती है, जहां से फंड मंजूर होकर वापस होमगार्ड मुख्यालय आता है। इस लंबी प्रक्रिया और बाबुओं की लापरवाही के कारण फाइलें हफ्तों तक एक ही टेबल पर धूल फांकती रहती हैं।
फरवरी से नहीं मिला वेतन, एरियर की फाइलें भी हुई गुम
डीटीसी में कार्यरत इन होमगार्डों को फरवरी महीने से वेतन का भुगतान नहीं किया गया है। इतना ही नहीं, करीब डेढ़ साल का एरियर भी अभी तक बकाया है। जवानों का आरोप है कि एरियर की फाइल किसी लापरवाह कर्मचारी की टेबल पर पड़ी हुई है और उसे खोजने वाला कोई नहीं है। वेतन न मिलने से होमगार्ड अनिल के बच्चों की शिक्षा बाधित हो रही है, तो राजेश अपनी पत्नी का इलाज नहीं करा पा रहे हैं। कई जवानों का तो स्थानीय दुकानों पर राशन का उधार इतना बढ़ गया है कि अब उन्हें सामान मिलना भी मुश्किल हो गया है।
विभागों के बीच ‘ब्लेम गेम’, पिस रहे हैं सुरक्षाकर्मी
वेतन में देरी को लेकर डीटीसी और होमगार्ड मुख्यालय के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। डीटीसी के वरिष्ठ अधिकारियों का दावा है कि उनकी ओर से स्टाफ सत्यापन के बाद फाइल समय पर भेज दी जाती है और उनकी तरफ से कोई देरी नहीं होती। दूसरी ओर, होमगार्ड मुख्यालय का कहना है कि जैसे ही उन्हें परिवहन विभाग से फंड प्राप्त होता है, वे तुरंत वेतन जारी कर देते हैं। विभागों की इस आपसी खींचतान और ‘ब्लेम गेम’ के बीच सुरक्षा में तैनात जवान खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं।
अधिकारियों की लापरवाही ने किया 2900 परिवारों को बेहाल
सूत्रों के अनुसार, अक्सर डीटीसी डिपो से ही फाइलें देरी से चलती हैं, जिससे पूरी चयन प्रक्रिया प्रभावित होती है। 10 तारीख तक फाइलें आगे न बढ़ने के कारण भुगतान का चक्र बिगड़ जाता है। प्रशासन की इस संवेदनहीनता का खामियाजा उन 2900 परिवारों को भुगतना पड़ रहा है, जिनका घर केवल इसी वेतन के भरोसे चलता है। महिला सुरक्षा जैसे संवेदनशील कार्य में लगे इन जवानों का कहना है कि यदि उन्हें समय पर वेतन नहीं मिला, तो उनके लिए ड्यूटी कर पाना मानसिक और आर्थिक रूप से असंभव हो जाएगा।


