Himachal News: हिमाचल प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। राज्य की ‘छोटी सरकार’ यानी पंचायतों और नगर निगमों के चुनाव को 2027 के विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल माना जा रहा है। सत्ताधारी कांग्रेस और विपक्षी भाजपा दोनों के लिए यह चुनाव प्रतिष्ठा का प्रश्न बन चुका है। साढे तीन साल से सत्ता में काबिज सुक्खू सरकार के कामकाज पर जनता की यह पहली बड़ी मुहर होगी। चुनावों में हार-जीत मिशन-2027 की राजनीतिक दिशा तय करेगी।
चुनावी रण में कांग्रेस की रणनीति और साख का सवाल
कांग्रेस सरकार के लिए यह चुनाव साढे तीन साल की उपलब्धियों और वादों की अग्निपरीक्षा है। प्रदेश अध्यक्ष विनय कुमार के नेतृत्व में पार्टी का यह पहला बड़ा चुनावी मुकाबला है। मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने मंत्रियों और विधायकों को मैदान में उतारकर अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। कांग्रेस को उम्मीद है कि वह अपनी गारंटियों के दम पर जनता का विश्वास जीतेगी। पार्टी का मानना है कि यह जीत विधानसभा चुनाव की राह को बेहद आसान बना देगी।
तैयारियों में भाजपा ने बनाई मनोवैज्ञानिक बढ़त
विपक्षी दल भाजपा ने टिकट आवंटन और प्रचार के मामले में कांग्रेस पर बढ़त बना ली है। पार्टी ने 3754 पंचायतों और चार नगर निगमों के लिए समय पर उम्मीदवारों की घोषणा की है। प्रदेश में कुल 21,654 पदों पर चुनाव होना है। भाजपा अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने सरकार पर विश्वासघात का आरोप लगाते हुए इसे जनता के हिसाब का चुनाव बताया है। भाजपा ने समर्थित उम्मीदवारों की सूची जारी कर प्रतिद्वंद्वी दल पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने का प्रयास किया है।
चुनाव का विशाल ढांचा और सत्ता का समीकरण
हिमाचल में चार नगर निगम, 51 शहरी निकाय और हजारों पंचायतों में मतदान होना है। नगर निगम चुनाव पार्टी चिह्न पर होंगे, जबकि अन्य चुनावों में आधिकारिक रूप से पार्टी सिंबल का प्रयोग नहीं होगा। इसके बावजूद दोनों दलों ने क्षेत्रीय स्तर पर अपने मजबूत योद्धाओं को समर्थन दिया है। जिला परिषद के 251 और पंचायत समिति के 1769 पदों पर भी कड़ा मुकाबला है। संगठन के पदाधिकारियों को सक्रिय कर दोनों दल ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में अपना वर्चस्व कायम करना चाहते हैं।


