New Delhi News: इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर शनिवार को स्विस एयर के विमान के साथ हुए हादसे ने विमानन सुरक्षा और तकनीकी रखरखाव पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि पायलट की सूझबूझ से एक बड़ी त्रासदी टल गई, लेकिन अब एयरलाइन की इंजीनियरिंग टीम इस गुत्थी को सुलझाने में जुटी है कि आखिर उड़ान भरते समय इंजन में आग क्यों लगी। फिलहाल यह विमान आईजीआई एयरपोर्ट पर ही खड़ा है और इसकी विस्तृत तकनीकी जांच की जा रही है।
तकनीकी जांच पूरी होने तक उड़ान पर रोक
सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए जांच प्रक्रिया पूरी होने तक इस विमान को उड़ान भरने की इजाजत नहीं दी जाएगी। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) और एयरलाइन की टीमें इंजन के डेटा ब्लैक बॉक्स और अन्य हिस्सों की बारीकी से जांच कर रही हैं। इस बीच एयरलाइंस ने इस रूट पर यात्रियों की सुविधा के लिए वैकल्पिक उड़ान की व्यवस्था करने का निर्णय लिया है। वर्तमान में दिल्ली और ज्यूरिख के बीच अन्य निर्धारित उड़ानें सामान्य रूप से संचालित हो रही हैं।
बर्ड हिट की कम लेकिन तकनीकी खराबी की अधिक आशंका
विमानन विशेषज्ञों के अनुसार इंजन में आग लगने के पीछे कई तकनीकी कारण हो सकते हैं। आमतौर पर बर्ड हिट को आग की सबसे बड़ी वजह माना जाता है, लेकिन यह घटना देर रात की है, इसलिए पक्षी के टकराने की संभावना बहुत कम है। दूसरी बड़ी आशंका कंप्रेशर में हवा के प्रवाह के बाधित होने (Compressor Stall) की है। ऐसी स्थिति में इंजन के भीतर का दबाव अनियंत्रित हो जाता है और आग की लपटें इंजन के पिछले हिस्से से बाहर निकलने लगती हैं।
ईंधन रिसाव या ‘मैटेलिक फटीग’ बन सकता है कारण
विशेषज्ञों ने फ्यूल या लुब्रिकेंट लाइन में लीकेज की आशंका भी जताई है। जेट इंजन के भीतर ईंधन की पाइपलाइनों का जाल होता है। यदि किसी हाई-प्रेशर पाइप में सूक्ष्म दरार भी आ जाए, तो गर्म इंजन पार्ट्स के संपर्क में आते ही ईंधन आग पकड़ लेता है। इसके अलावा ‘मैटेलिक फटीग’ यानी धातु की थकान भी एक वजह हो सकती है। यदि टर्बाइन का एक ब्लेड भी टूटता है, तो वह इंजन के भीतर किसी ‘ग्रैनेड’ की तरह फटकर भारी तबाही मचा सकता है।
