Business News: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं लेकिन इसके बावजूद सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने आज पेट्रोल और डीजल के दामों में कोई संशोधन नहीं किया है। ब्रेंट क्रूड के भाव में आई तेजी ने आने वाले दिनों में महंगाई बढ़ने का जोखिम पैदा कर दिया है। वैश्विक स्तर पर जारी उठापटक के बीच घरेलू बाजार की निगाहें अब सप्ताह के मध्य में होने वाली संभावित हलचल पर केंद्रित हैं।
देश की राजधानी दिल्ली में पेट्रोल और डीजल की कीमतें कल के स्तर पर ही स्थिर बनी हुई हैं। वहीं दूसरी ओर मुंबई के नागरिकों को अभी भी देश के प्रमुख महानगरों में सबसे महंगा ईंधन खरीदना पड़ रहा है। वैश्विक ऊर्जा संकट के इस दौर में खुदरा कीमतों में स्थिरता बनी रहने से आम उपभोक्ताओं और कारोबारियों को अपने दैनिक परिवहन खर्च का प्रबंधन करने में काफी सहायता मिल रही है।
पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर ग्लोबल क्रूड का असर
वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की आपूर्ति में कमी और विभिन्न क्षेत्रों में जारी भू-राजनीतिक तनाव की वजह से हाल के दिनों में तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखने को मिला है। भारतीय रुपये की विनिमय दर के संदर्भ में ब्रेंट क्रूड के महंगे होने के कारण सरकारी तेल कंपनियों के लाभ मार्जिन पर लगातार दबाव बढ़ता जा रहा है। यदि ये कंपनियां बढ़ी हुई लागत का भार ग्राहकों पर स्थानांतरित नहीं करती हैं तो उन्हें अपने खातों में अंडर-रिकवरीज यानी घाटे का सामना करना पड़ सकता है।
तेल विपणन कंपनियों के लिए मौजूदा हालात एक जटिल चुनौती पेश कर रहे हैं। एक ओर उन्हें अपने वित्तीय स्वास्थ्य को बनाए रखना है तो दूसरी ओर सरकार के महंगाई नियंत्रण के एजेंडे का भी समर्थन करना है। लगातार बढ़ते आयात बिल का असर देश के चालू खाते के घाटे पर भी पड़ सकता है। इसलिए ईंधन की कीमतों को स्थिर रखने का निर्णय केवल राजनीतिक नहीं बल्कि व्यापक आर्थिक मजबूरियों को ध्यान में रखकर लिया गया एक सोचा-समझा कदम है।
महंगाई का खतरा और स्थिर तेल कीमतों का महत्व
देश में खुदरा महंगाई दर को नियंत्रित रखने के लिए पेट्रोल और डीजल की कीमतों में स्थिरता बनाए रखना एक अत्यंत महत्वपूर्ण रणनीतिक उपाय माना जाता है। परिवहन लागत कम और स्थिर रहने की स्थिति में दैनिक उपभोग की वस्तुओं विशेषकर सब्जियों, फलों और दूध जैसी जरूरी चीजों के दाम स्वतः ही नियंत्रण में बने रहते हैं। ऐसे में नीति निर्माताओं के समक्ष तेल कंपनियों की व्यावसायिक आवश्यकताओं और आम जनता की क्रय शक्ति के बीच एक नाजुक संतुलन स्थापित करने की बड़ी चुनौती है।
भारत के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में स्थानीय करों और मूल्य वर्धित कर की संरचना भिन्न होने के कारण पेट्रोल और डीजल के खुदरा भावों में क्षेत्रीय अंतर देखने को मिलता है। नीचे दी गई तालिका में देश के चार प्रमुख महानगरों के नवीनतम मूल्य प्रस्तुत किए गए हैं। इन आंकड़ों की सहायता से आप अपने शहर में वाहन चलाने के दैनिक खर्च का सटीक अनुमान लगा सकते हैं और अपनी यात्रा योजना का बेहतर प्रबंधन कर सकते हैं। शहर पेट्रोल (प्रति लीटर) डीजल (प्रति लीटर) नई दिल्ली 94.72 87.62 मुंबई 104.21 92.15 कोलकाता 103.94 90.76 चेन्नई 100.75 92.34
एक्साइज ड्यूटी में कटौती की बढ़ी उम्मीदें
बाजार विशेषज्ञों और ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें इसी प्रकार ऊंचे स्तर पर बनी रहीं तो केंद्र सरकार जल्द ही एक्साइज ड्यूटी में कटौती करने पर विचार कर सकती है। इस प्रकार के वित्तीय हस्तक्षेप से तेल विपणन कंपनियों को आवश्यक राहत प्रदान करने के साथ ही उपभोक्ताओं को कीमतों में सीधी और तीखी बढ़ोतरी के प्रकोप से भी बचाया जा सकेगा। बाजार की मौजूदा अनिश्चितता के दौर में अपने मासिक ईंधन खर्च पर पैनी नजर रखना और उसे ट्रैक करना घरेलू बजट को संतुलित बनाए रखने के लिए नितांत आवश्यक है।
