Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में स्वास्थ्य विभाग ने एक अंतरराष्ट्रीय स्तर के नकली दवा गिरोह का पर्दाफाश किया है। मुंबई में दिमागी बीमारी की नकली दवाइयां बनाकर उन्हें नामी कंपनियों के ठप्पे के साथ ऑनलाइन बेचा जा रहा था। इस काले कारोबार का खुलासा तब हुआ जब स्वास्थ्य विभाग ने संबंधित कंपनी को नोटिस जारी किया। जांच के दौरान ड्रग इंस्पेक्टर ने पाया कि कंपनी ने वे दवाइयां कभी बनाई ही नहीं थीं। इस मामले में मुख्य आरोपी मोहम्मद अहमद को गिरफ्तार कर लिया गया है।
मुंबई की फैक्टरी और चंबा का ऑनलाइन कनेक्शन
जांच के दौरान ड्रग इंस्पेक्टर लवली ठाकुर ने जुलाहकड़ी में हरमीत नामक युवक को बिना बिल की दवाइयों के साथ पकड़ा था। उसके पास ‘प्रेगाबलिन’ के 750 कैप्सूल बरामद हुए, जो उसने ऑनलाइन मुंबई से मंगवाए थे। तफ्तीश में पता चला कि उत्तर प्रदेश का रहने वाला मोहम्मद अहमद मुंबई से बिना बिल के इन नकली दवाओं की खेप चंबा भेज रहा था। आरोपी कूरियर के जरिए चंबा में दवाओं की सप्लाई करता था। अदालत ने अब मुख्य आरोपी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
नशे के रूप में हो रहा था नकली दवाओं का उपयोग
इस पूरे घोटाले का सबसे खौफनाक पहलू यह है कि युवा इन नकली दवाओं का इस्तेमाल नशे के तौर पर कर रहे थे। दिमागी बीमारी के लिए इस्तेमाल होने वाली दवाओं को गैरकानूनी तरीके से नशेड़ियों तक पहुंचाया जा रहा था। विभाग अब यह पता लगाने में जुटा है कि मोहम्मद अहमद ने अब तक कहां-कहां और किन-किन लोगों को यह जहर बेचा है। आरोपी ने पूछताछ में अपने चार अन्य साथियों के नाम भी उगले हैं, जिनकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है।
चंबा में ड्रग माफिया पर विभाग की सर्जिकल स्ट्राइक
चंबा में अवैध रूप से नशीली दवाएं बेचने वालों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग ने अभियान तेज कर दिया है। पिछले दो वर्षों के भीतर विभाग ने नशीली दवाओं की तस्करी के करीब 40 मामले दर्ज किए हैं। इस कड़ी कार्रवाई के तहत दो दर्जन से अधिक केमिस्टों के लाइसेंस रद्द किए जा चुके हैं। वर्तमान में तीन केमिस्टों के खिलाफ अदालत में मुकदमे चल रहे हैं। राज्य दवा नियंत्रक मनीष कपूर ने बताया कि विभाग इस नेटवर्क की जड़ तक पहुंचने के लिए हर पहलू की बारीकी से जांच कर रहा है।
फर्जी ठप्पे का खेल और कंपनी की बेगुनाही
स्वास्थ्य विभाग की टीम जब मुंबई स्थित उस फैक्टरी में पहुंची जिसका ठप्पा दवाओं पर लगा था, तो वहां के प्रबंधन ने हैरानी जताई। जांच में स्पष्ट हुआ कि आरोपी कंपनी के नाम और ब्रांड का अवैध इस्तेमाल कर रहे थे। कंपनी को अपने नाम पर चल रहे इस फर्जीवाड़े की जरा भी भनक नहीं थी। ड्रग इंस्पेक्टरों ने वहां से महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए हैं जो आरोपियों को सजा दिलाने में अहम साबित होंगे। विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे ऑनलाइन दवाइयां खरीदते समय सतर्क रहें और केवल अधिकृत केमिस्ट से ही दवाएं लें।
