Himachal News: खाड़ी देशों में जारी भीषण तनाव और युद्ध की लपटें अब हिमाचल प्रदेश के पहाड़ों तक पहुंच गई हैं। ईरान, इस्राइल और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष ने वैश्विक तेल आपूर्ति को बुरी तरह प्रभावित किया है। इसका सीधा असर प्रदेश के बुनियादी ढांचे और सड़क निर्माण कार्यों पर दिखने लगा है। कच्चे तेल की भारी कमी के कारण रिफाइनरियों में तारकोल (बिटुमेन) का उत्पादन 50 फीसदी तक गिर गया है। रिफाइनरियों को पर्याप्त कच्चा तेल नहीं मिल पा रहा है, जिससे पूरे प्रदेश में सड़क टारिंग का काम ठप होने की कगार पर है।
तारकोल की कीमतों में लगी आग, 88 हजार पहुंचा भाव
कच्चे माल के संकट और महंगी माल ढुलाई ने निर्माण सामग्री की कीमतों को आसमान पर पहुंचा दिया है। जो तारकोल कुछ समय पहले 44,000 रुपये प्रति मीट्रिक टन की दर से उपलब्ध था, उसकी कीमत अब बढ़कर 88,000 रुपये के करीब पहुंच गई है। कीमतों में इस भारी उछाल और बाजार में मची किल्लत ने लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी), एनएचएआई और निजी ठेकेदारों की नींद उड़ा दी है। उत्पादन आधा रहने से आपूर्ति श्रृंखला पूरी तरह चरमरा गई है, जिससे विकास परियोजनाओं की लागत अनियंत्रित हो रही है।
टारिंग सीजन में ठेकेदारों ने खींचे हाथ
हिमाचल प्रदेश में वर्तमान समय सड़क टारिंग के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। गर्मियों के इन महीनों में ही विभाग सड़कों को पक्का करने का लक्ष्य रखता है। हालांकि, तारकोल की कमी और बढ़ती लागत के कारण ठेकेदार अब नए टेंडर डालने से बच रहे हैं। हजारों किलोमीटर लंबी सड़कों की मरम्मत और निर्माण कार्य बीच में ही रुक गया है। जिन ठेकेदारों ने पहले ही भुगतान कर दिया है, उन्हें भी सामग्री के लिए हफ्तों लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। यदि जुलाई में मानसून शुरू हो गया, तो टारिंग की गुणवत्ता प्रभावित होगी।
पर्यटन और सेब सीजन पर मंडराया खतरा
सड़कों की खस्ताहाल दशा का सीधा असर हिमाचल की आर्थिकी की रीढ़ माने जाने वाले पर्यटन और सेब सीजन पर पड़ सकता है। सरकार ने दावा किया था कि मानसून से पहले प्रदेश की मुख्य सड़कों की दशा सुधार ली जाएगी। अब तारकोल संकट के कारण ये योजनाएं खटाई में पड़ती नजर आ रही हैं। खस्ताहाल सड़कों के कारण बागवानों को मंडियों तक सेब पहुंचाने में दिक्कत होगी। साथ ही, खराब सड़कें बाहरी राज्यों से आने वाले पर्यटकों को भी निराश कर सकती हैं।
रिफाइनरियों में 15 दिन का वेटिंग पीरियड
पीडब्ल्यूडी के इंजीनियर-इन-चीफ एनपी सिंह ने बताया कि खाड़ी युद्ध की वजह से तारकोल के दाम दोगुने हो गए हैं। इस गंभीर स्थिति से प्रदेश सरकार और केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय को अवगत करा दिया गया है। सहायक अभियंताओं के अनुसार, पानीपत रिफाइनरी में उत्पादन कम होने से भारी संकट बना हुआ है। ठेकेदारों की मांग पूरी करने में 10 से 15 दिन का समय लग रहा है। तारकोल लेने गए ट्रक रिफाइनरी के बाहर ही खड़े रहने को मजबूर हैं। अंतरराष्ट्रीय संकट का यह दौर हिमाचल के निर्माण क्षेत्र के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
