Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर स्थित आरएलए (RLA) कार्यालय में हुए बड़े वाहन पंजीकरण घोटाले में दिल्ली क्राइम ब्रांच ने चार्जशीट दाखिल कर दी है। दिल्ली हाईकोर्ट में पेश इस चार्जशीट ने पूरे घोटाले की खौफनाक परतें खोल दी हैं। जांच में साफ हुआ है कि यह महज कागजी हेरफेर नहीं था। यह एक सुनियोजित नेटवर्क था, जिसमें सरकारी तंत्र के भीतर बैठे लोग और बाहरी दलाल मिलकर फर्जीवाड़ा कर रहे थे। अब इस मामले की गूंज दिल्ली से लेकर हिमाचल के सत्ता गलियारों तक सुनाई दे रही है।
डिजिटल फुटप्रिंट्स से फंसा ‘सिस्टम’ का जाल
क्राइम ब्रांच ने आईपी एड्रेस और डिजिटल लॉग्स को ट्रैक कर घोटाले की जड़ तक पहुंचने में सफलता पाई है। जांच रिपोर्ट के अनुसार, फर्जी रजिस्ट्रेशन के लिए जिन कंप्यूटरों का उपयोग हुआ, उनकी लोकेशन सीधे आरोपी गौरव और सुभाष के नेटवर्क से जुड़ी थी। यह साबित हो गया है कि गाड़ियों का पंजीकरण सिस्टम के भीतर बैठकर ही किया जा रहा था। सुभाष से सीधे तौर पर 44 और गौरव के नाम पर 45 गाड़ियों का फर्जी रिकॉर्ड मिला है। आशंका है कि ऐसी गाड़ियों की संख्या एक हजार से अधिक हो सकती है।
30 करोड़ के लेनदेन और चोरी की गाड़ियों का धंधा
जांच एजेंसियों के अनुसार, इस फर्जीवाड़े के जरिए करीब 30 करोड़ रुपये के अवैध लेनदेन का अनुमान है। जालसाज लोगों को आरएलए की असली जैसी दिखने वाली आरसी (RC) दिखाते थे। भरोसे में लेकर महंगी गाड़ियां बेची जाती थीं, लेकिन बाद में वे वाहन चोरी के या फर्जी दस्तावेजों वाले निकलते थे। सुभाष के कार्यकाल में हुए 357 रजिस्ट्रेशन की बारीकी से जांच की जा रही है। इसमें बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं और सिस्टम के दुरुपयोग के प्रमाण मिले हैं।
किंगपिन गौरव की जमानत अर्जी फिर खारिज
इस पूरे घोटाले का मुख्य सूत्रधार गौरव को माना जा रहा है। जांच में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि गौरव ने तत्कालीन एसडीएम की आधिकारिक मेल का एक्सेस भी अपने फोन पर ले रखा था। इसी डिजिटल सेंधमारी के जरिए वह फर्जीवाड़े को अंजाम देता था। दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को गौरव की अग्रिम जमानत याचिका एक बार फिर खारिज कर दी है। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उसे राहत देने से इनकार कर दिया। बिलासपुर पुलिस ने भी इस मामले में रविवार को पहला केस दर्ज कर लिया है।
एसपी बिलासपुर का सख्त रुख
बिलासपुर के पुलिस अधीक्षक संदीप धवल ने मामले की पुष्टि करते हुए कहा कि रविवार को प्राप्त शिकायत के आधार पर पहला मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अब बैंक लेनदेन, वाहन रिकॉर्ड और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की गहनता से पड़ताल कर रही है। सरकार द्वारा गठित कमेटियां भी अपनी रिपोर्ट तैयार करने में जुटी हैं। एसपी ने स्पष्ट किया कि जांच में जो भी सरकारी कर्मचारी या बाहरी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
