Parliament News: सरकार ने गुरुवार से तीन दिवसीय संसद का विशेष सत्र बुलाया है। इस सत्र में तीन ऐतिहासिक बिल पेश किए जाएंगे, जो चुनावी ढांचे को बदल सकते हैं। विपक्षी दलों ने परिसीमन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। वहीं, सरकारी सूत्रों ने बताया कि परिसीमन केवल 2011 की जनगणना पर आधारित नहीं होगा, बल्कि एक नए फॉर्मूले से सभी राज्यों की सीटें बढ़ेंगी।
सरकार का नया फॉर्मूला: हर राज्य के प्रतिनिधित्व में 50% तक का इजाफा
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया में सभी राज्यों की हिस्सेदारी को आनुपातिक रूप से 50 प्रतिशत तक बढ़ाने का प्रस्ताव है। एक सरकारी सूत्र ने बताया कि सभी राज्यों को 2011 की जनगणना के आधार पर मिलने वाले प्रतिनिधित्व से कहीं अधिक सीटें मिलेंगी। इससे दक्षिणी राज्यों की चिंता कम होने की उम्मीद है। तमिलनाडु को मौजूदा 39 सीटों के बजाय 59 सीटें मिल सकती हैं, जबकि 2011 की जनगणना के आधार पर यह 49 होतीं।
उत्तर प्रदेश को 120, महाराष्ट्र को 72, बिहार को 60 सीटें प्रस्तावित
प्रस्तावित योजना के तहत राज्यों की लोकसभा सीटों में बंपर इजाफा होगा। उत्तर प्रदेश की सीटें 80 से बढ़कर 120 हो जाएंगी। महाराष्ट्र को 48 के बजाय 72, पश्चिम बंगाल को 42 के बजाय 63, बिहार को 40 के बजाय 60 सीटें मिलेंगी। तमिलनाडु को 59, मध्य प्रदेश को 44, कर्नाटक को 42, गुजरात को 39, राजस्थान और आंध्र प्रदेश को 38-38 सीटें प्रस्तावित हैं। ओडिशा को 32 और केरल को 30 सीटें मिल सकती हैं। अधिकतम सीटों की संख्या 850 करने का प्रावधान है, जैसे अभी 550 की ऊपरी सीमा है।
विपक्ष ने किया विधेयकों का विरोध, राहुल गांधी ने बताया ‘राष्ट्र-विरोधी कृत्य’
विपक्षी दलों ने परिसीमन पर संवैधानिक संशोधन के खिलाफ वोट करने का फैसला किया है। उनका आरोप है कि इससे दक्षिण, उत्तर-पश्चिम, उत्तर-पूर्व और छोटे राज्यों का प्रतिनिधित्व कम होगा। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इसे ‘राष्ट्र-विरोधी कृत्य’ करार दिया। उन्होंने मांग की कि सरकार 2023 में सर्वसम्मति से पारित अनुच्छेद 334(a) का पालन करते हुए मौजूदा 543 सीटों के आधार पर ही महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण तुरंत लागू करे। हालांकि, सरकार का कहना है कि नए फॉर्मूले से किसी राज्य को नुकसान नहीं होगा।
केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल भी पेश किया जाएगा
संसद के इस विशेष सत्र में तीन प्रमुख विधेयक पेश किए जा रहे हैं। इनमें संविधान (131वां संशोधन) बिल, परिसीमन बिल 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल शामिल हैं। सरकार का लक्ष्य 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले महिला आरक्षण और नई सीटों को लागू करना है। विपक्ष का कहना है कि वे परिसीमन के प्रावधानों के खिलाफ पूरी ताकत से लड़ेंगे। अगले दो दिनों में इस मुद्दे पर लोकसभा और राज्यसभा में जमकर बहस होने की संभावना है।
