India News: ईरान में युद्ध की स्थिति और होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी से वैश्विक ऊर्जा बाजार में उथल-पुथल मची है। हालांकि, ईरान द्वारा भारत सहित पांच मित्र देशों को इस मार्ग के इस्तेमाल की छूट देने से गैस आपूर्ति में सुधार हुआ है। इसका सकारात्मक असर भारतीय घरेलू बाजार में रसोई गैस की उपलब्धता पर भी पड़ा है। इसी बीच, पेट्रोलियम मंत्रालय ने सभी उपभोक्ताओं के लिए बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण (e-KYC) को अनिवार्य कर दिया है।
देश के प्रमुख शहरों में आज के ताजा रेट्स
देश के महानगरों में आज घरेलू और कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाले सिलेंडर की कीमत 913 रुपये पर स्थिर बनी हुई है। वहीं, कमर्शियल सिलेंडर की कीमत यहाँ 2078.5 रुपये दर्ज की गई है। अन्य शहरों जैसे मुंबई में घरेलू गैस 912.5 रुपये और कोलकाता में 939 रुपये में मिल रही है। हैदराबाद में यह दर सबसे कम 905 रुपये प्रति सिलेंडर है।
घरेलू बजट और छोटे व्यवसायों पर कीमतों का प्रभाव
रसोई गैस की कीमतों में स्थिरता या वृद्धि का सीधा असर आम भारतीय परिवारों के मासिक बजट पर पड़ता है। अधिकांश घरों में एलपीजी ही खाना पकाने का एकमात्र प्राथमिक ईंधन है। केवल घरों तक ही नहीं, बल्कि रेस्टोरेंट और स्ट्रीट फूड विक्रेताओं के लिए भी एलपीजी अनिवार्य है। कीमतों में होने वाला कोई भी बड़ा फेरबदल कैटरिंग और फूड इंडस्ट्री की लागत को सीधे तौर पर प्रभावित करता है।
कैसे तय होती हैं भारत में गैस की कीमतें?
भारत में सरकारी तेल विपणन कंपनियां (OMCs) अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क दरों के आधार पर गैस की कीमतें तय करती हैं। इसमें वैश्विक कच्चे तेल की दरों के साथ-साथ अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की स्थिति अहम भूमिका निभाती है। कंपनियां आमतौर पर हर महीने की पहली तारीख को इन कीमतों की समीक्षा करती हैं। अंतरराष्ट्रीय तनाव और विनिमय दर में उतार-चढ़ाव ही घरेलू बाजार में सिलेंडरों के दाम घटने या बढ़ने का मुख्य कारण बनते हैं।
e-KYC के लिए उपभोक्ताओं को करने होंगे ये काम
मंत्रालय के नए निर्देशों के अनुसार, सभी घरेलू उपभोक्ताओं को बायोमेट्रिक आधारित [Aadhaar Redacted] प्रमाणीकरण पूरा करना होगा। यह कदम सब्सिडी के सही वितरण और फर्जी कनेक्शनों की पहचान करने के लिए उठाया गया है। उपभोक्ता अपने नजदीकी गैस एजेंसी पर जाकर या संबंधित मोबाइल ऐप के जरिए इस प्रक्रिया को पूरा कर सकते हैं। समय पर प्रमाणीकरण न कराने पर भविष्य में सब्सिडी प्राप्त करने में तकनीकी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
