Kerala News: केरल विधानसभा चुनाव के शुरुआती रुझानों ने राज्य की राजनीतिक तस्वीर साफ कर दी है। कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) ने 140 सीटों वाली विधानसभा में 100 का आंकड़ा पार कर लिया है। सत्तारूढ़ एलडीएफ (LDF) महज 41 सीटों पर सिमटती नजर आ रही है। इस शानदार प्रदर्शन के साथ ही केरल में एक दशक बाद कांग्रेस की सत्ता में वापसी तय हो गई है। हालांकि, इस बड़ी जीत के साथ ही अब मुख्यमंत्री पद के चेहरे को लेकर पार्टी के भीतर मंथन और लॉबिंग तेज हो गई है।
सीएम की दौड़ में शशि थरूर और केसी वेणुगोपाल सबसे आगे
केरल में नेतृत्व को लेकर सस्पेंस बरकरार है। मुख्यमंत्री की रेस में तिरुवनंतपुरम के सांसद शशि थरूर का नाम प्रमुखता से चल रहा है। वहीं, संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल के समर्थक भी सक्रिय हो गए हैं। सड़कों पर वेणुगोपाल के बड़े-बड़े कटआउट लगाकर जश्न मनाया जा रहा है। थरूर ने मुख्यमंत्री चयन की प्रक्रिया पर कहा कि हाईकमान विजयी विधायकों की राय जानने के बाद ही अंतिम फैसला लेगा। उन्होंने मुस्कुराते हुए सीधे तौर पर अपनी दावेदारी पर कुछ भी कहने से फिलहाल परहेज किया।
रेस में वीडी सतीशन और रमेश चेन्निथला भी शामिल
मुख्यमंत्री पद की फेहरिस्त में केवल थरूर और वेणुगोपाल ही नहीं हैं। वर्तमान नेता प्रतिपक्ष वीडी सतीशन और पूर्व नेता प्रतिपक्ष रमेश चेन्निथला भी कद्दावर दावेदार माने जा रहे हैं। सतीशन ने चुनाव के दौरान गठबंधन को एकजुट रखने में अहम भूमिका निभाई है। दूसरी ओर, चेन्निथला के पास सरकार और संगठन दोनों का लंबा अनुभव है। कांग्रेस आलाकमान के लिए इनमें से किसी एक नाम पर मुहर लगाना चुनौतीपूर्ण होगा। सहयोगी दल इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) की पसंद भी इस फैसले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
विपक्ष ने साधा निशाना, लॉबिंग पर उठाए सवाल
कांग्रेस के भीतर चल रही इस खींचतान पर विपक्षी दल माकपा (CPI-M) ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। माकपा महासचिव एमए बेबी ने आरोप लगाया कि जीत सुनिश्चित होते ही कांग्रेस नेताओं के बीच तीखी लॉबिंग और आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। उन्होंने कहा कि केरल की जनता नेताओं के बीच आपसी हमलों को देख रही है। विपक्ष का दावा है कि मुख्यमंत्री पद की यह जंग गठबंधन की स्थिरता को प्रभावित कर सकती है। सहयोगी दलों की ओर से भी अपने पसंदीदा उम्मीदवार के लिए संकेत मिलने लगे हैं।
केरल में सत्ता परिवर्तन की परंपरा फिर बहाल
केरल की राजनीति में हर पांच साल में सरकार बदलने का रिवाज रहा है। साल 2021 में पिनरई विजयन ने लगातार दूसरी बार जीतकर इस परंपरा को तोड़ दिया था। अब 2026 के नतीजों ने संकेत दिया है कि जनता फिर से पारंपरिक सत्ता-परिवर्तन की ओर लौट आई है। कांग्रेस आखिरी बार 2011 से 2016 तक ओमन चांडी के नेतृत्व में सत्ता में रही थी। दस साल के लंबे इंतजार के बाद यूडीएफ की यह वापसी कार्यकर्ताओं में नया जोश भरने वाली साबित होगी।


